हाईकोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई को हद पार करार दिया, फिर से बनाएं इमारत
पूर्व मेदिनीपुर में सरकारी जमीन पर गिराई गई व्यावसायिक इमारत को दोबारा बनाने का निर्देश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व मेदिनीपुर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान बिना वैध अधिकार याचिकाकर्ताओं की दो मंजिला व्यावसायिक इमारत गिराने को हद पार करार देते हुए नई इमारत बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने प्रभावितों को वैकल्पिक आवास और 10 लाख रुपये मुआवजे का भी प्रावधान किया है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व मेदिनीपुर में सरकारी जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के दौरान दो मंजिला व्यावसायिक इमारत गिराए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं की इमारत फिर से बनाने और प्रभावितों को वैकल्पिक आवास व मुआवजा देने का आदेश दिया।
जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कबिता मन्ना और एक अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के दौरान उनकी व्यावसायिक इमारत भी गिरा दी गई। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की संपत्ति को बिना वैध अधिकार के गिराया गया।
कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि नई इमारत याचिकाकर्ताओं के 1 मार्च के पूरक हलफनामे के साथ संलग्न स्वीकृत नक्शे के अनुसार बनाई जाए। इसके निर्माण के लिए दो साल का समय दिया गया है। निर्माण पूरा होने पर इमारत का कब्जा याचिकाकर्ताओं को सौंपना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नई इमारत तैयार होने तक प्रभावित लोगों को बिना किसी शुल्क के वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाए। साथ ही 10 लाख रुपये मुआवजे का भुगतान भी किया जाए।
अगस्त 2024 में एक समकक्ष पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि यदि पीडब्ल्यूडी की सड़क पर अवैध अतिक्रमण पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जाए। इसके बाद कार्यकारी अभियंता ने सरकारी जमीन की दोबारा पैमाइश कराने के निर्देश दिए। राजस्व निरीक्षक ने विवादित क्षेत्र का निरीक्षण कर 10 सितंबर 2024 और 17 मार्च 2025 को रिपोर्ट तथा नक्शा पेश किया। इन रिपोर्टों में भूखंडों को सटा हुआ बताया गया और सरकारी प्लॉट नंबर 1 और 12 पर कथित अतिक्रमण का उल्लेख था।
कार्यकारी अभियंता ने अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी और मार्च 2025 में उन्हें अंतरिम राहत मिली। 19 मई 2025 को डिवीजन बेंच ने रिकॉर्ड किया कि राज्य ने सरकारी जमीन के एक प्लॉट पर मौजूद अनधिकृत निर्माण गिराया था।
कोर्ट ने माना कि सामान्य तौर पर रिट कोर्ट विवादित तथ्यों में नहीं जाता, लेकिन यदि पर्याप्त साक्ष्य हों तो रिकॉर्ड के आधार पर फैसला कर सकता है। उसने पाया कि अधिकारियों ने याचिकाकर्ताओं के प्लॉट पर बने निर्माण को गिराकर अपनी सीमा से आगे कार्रवाई की। याचिका स्वीकार करते हुए नई इमारत बनाने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ताओं ने स्थानीय ग्राम पंचायत से स्वीकृत नक्शा हासिल कर दो मंजिला व्यावसायिक इमारत बनाई थी। दूसरे याचिकाकर्ता का कारोबार भी इसी परिसर से चलता था। कार्रवाई के दौरान उनकी अपनी संपत्ति भी प्रभावित हुई।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की संपत्ति को बिना वैध अधिकार के गिराए जाने को देखते हुए मुआवजा और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था का आदेश दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कौन सी न्यायाधीश ने याचिका की सुनवाई की?
- जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने कबिता मन्ना और एक अन्य की याचिका पर सुनवाई की।
- अतिक्रमण हटाने के दौरान इमारत क्यों गिराई गई?
- अतिक्रमण हटाने का आदेश कार्यकारी अभियंता ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण पाए जाने के बाद दिया था।
- क्या प्रभावितों को कोई राहत दी गई है?
- कोर्ट ने प्रभावितों को बिना शुल्क के वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने और मुआवजा देने का आदेश दिया है।
- क्या कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई पर कोई टिप्पणी की?
- कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई को अपनी सीमा से आगे बताते हुए उसे अवैध माना।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद










Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.