पुदीना की खेती से 90 दिन में 50 हजार तक मुनाफा
गेहूं-धान से अलग इस फसल की खेती पर किसानों का ध्यान बढ़ा है
खड़गपुर के किसान पुदीना की खेती से 90 से 120 दिनों में पहली कटाई कर 45 से 55 हजार रुपए तक का मुनाफा कमा रहे हैं। इस खेती में पत्तियों से तेल निकालकर बेचने पर खर्च निकालने के बाद भी लाभ होता है। सही प्रबंधन और समय पर कटाई से तेल की उपज और मुनाफा बढ़ाया जा सकता है।
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खड़गपुर। खड़गपुर के किसान अब पुदीना की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस फसल की कटाई 90 से 120 दिनों में हो जाती है और सही प्रबंधन से एक एकड़ से 45 से 55 हजार रुपए तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।
किसान अंशुमान ने बताया कि पुदीना की खेती का पहला काम सितंबर के मध्य से नर्सरी तैयार करना होता है। इसमें जड़ों को छोटे हिस्सों में लगाकर सिंचाई की जाती है। ठंडे मौसम में जड़ें अच्छी तरह विकसित हो जाती हैं, फिर जनवरी से फरवरी के अंत तक मुख्य खेत में रोपाई की जाती है। कुछ किसान मार्च या अप्रैल में भी पिछैती रोपाई करते हैं।
खेत की तैयारी में खाद, सिंचाई और मिट्टी की गुणवत्ता का ध्यान रखना जरूरी है ताकि पौधों को अच्छी बढ़वार मिले। समय पर कटाई करने पर पहली कटाई 90 से 100 दिन में हो जाती है, जो मई-जून में होती है। अच्छी स्थिति में दूसरी कटाई जुलाई-अगस्त में संभव है, जो फसल की हालत पर निर्भर करती है।
पुदीना से कमाई का मुख्य स्रोत तेल होता है। किसान पत्तियों को बेचने के बजाय आसवन से तेल निकालते हैं। एक एकड़ में खेती, खाद, सिंचाई, मजदूरी और तेल निकालने पर 30 से 40 हजार रुपए खर्च आते हैं। अच्छी देखभाल से 60 से 80 लीटर मेंथा तेल मिल सकता है, बेहतर प्रबंधन में यह 100 लीटर तक पहुंच जाता है।
तेल का बाजार भाव मांग के अनुसार बदलता रहता है। सामान्यतः यह 1,000 से 1,400 रुपए प्रति लीटर के बीच रहता है, जबकि अच्छी मांग पर 1,500 रुपए या उससे अधिक भी मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर 70 लीटर तेल पर 84 हजार रुपए की बिक्री होती है, जिसमें से लागत निकालने के बाद 45 से 55 हजार रुपए तक बचते हैं।
अंशुमान ने खाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। रोपाई के 30 दिन बाद यूरिया के साथ सल्फर का उपयोग पौधों की बढ़वार और पत्तियों की गुणवत्ता के लिए जरूरी है। किसान कोसी, शिवालिक और गोमती जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं।
कटाई का समय भी तेल की मात्रा पर असर डालता है। साफ और तेज धूप वाले दिन कटाई करनी चाहिए और कटाई के बाद पौधों को 2 से 3 घंटे धूप में रखना चाहिए। बारिश या छांव में कटाई से तेल की मात्रा प्रभावित होती है। सही समय पर कटाई और तेल निकालना कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।
दूसरी ओर, पालीगंज में पुनपुन नदी का जलस्तर घटने से धान की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। किसान सुरेश प्रसाद ने बताया कि पांच बीघा में लगाया धान खत्म हो गया है। राजू कुमार ने कहा कि केसीसी से लोन लेकर खेती की थी, अब बैंक का कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। क्षेत्र में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पुदीना की खेती कब शुरू करनी चाहिए?
- नर्सरी की शुरुआत सितंबर के मध्य से करनी होती है, जिससे जड़े ठंडे मौसम में अच्छी तरह विकसित हो सकें।
- पुदीना के बेहतर उत्पादन के लिए कौन-कौन सी किस्में उपयुक्त हैं?
- किसान कोसी, शिवालिक और गोमती जैसी उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं।
- तेल की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कटाई का सही समय क्या है?
- साफ और तेज धूप वाले दिन कटाई करनी चाहिए, और कटाई के बाद पौधों को 2-3 घंटे धूप में रखना चाहिए।
- पुदीना की खेती में खाद प्रबंधन कैसे करना चाहिए?
- रोपाई के 30 दिन बाद यूरिया के साथ सल्फर का उपयोग पौधों की बढ़वार और पत्तियों की गुणवत्ता के लिए जरूरी है।
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