भरतपुर में सहायक अभियंता को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
एसीबी ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते अधिकारी को पकड़ा, जांच जारी
भरतपुर में एसीबी ने सहायक अभियंता गोविंद प्रसाद को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है, जो विकास कार्यों के प्रमाण पत्र सत्यापित करने के नाम पर ठेकेदारों से पैसे मांग रहा था। एसीबी ने शिकायत मिलने के बाद ट्रैप के तहत उनकी गिरफ्तारी की और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। नागरिक 24 घंटे टोल फ्री नंबर और व्हाट्सएप हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
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भरतपुर जिले में एसीबी ने सहायक अभियंता गोविंद प्रसाद को 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 14 सितंबर को एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर की गई। आरोपी अधिकारी विकास कार्यों के प्रमाण पत्र सत्यापित करने के नाम पर ठेकेदारों से पैसे मांग रहा था।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पुलिस महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि भरतपुर इकाई को एक परिवादी और सहपरिवादी की ओर से लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत में कहा गया कि पंचायत समिति भुसावर में सहायक अभियंता गोविंद प्रसाद ने विकास कार्यों के बाद माप पुस्तिका और कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र सत्यापित करने के एवज में 30,000 रुपये रिश्वत की मांग की और न देने पर काम रोकने की धमकी दी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने गोपनीय सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत की मांग की पुष्टि हुई। इसके बाद एसीबी रेंज भरतपुर के उप महानिरीक्षक ओमप्रकाश मीणा के नेतृत्व में और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित सिंह के निर्देशन में विशेष ट्रैप टीम बनाई गई। टीम का नेतृत्व पुलिस निरीक्षक महेंद्र सिंह ने किया।
तय योजना के अनुसार परिवादी को रिश्वत की रकम लेकर आरोपी के पास भेजा गया। जैसे ही गोविंद प्रसाद ने 15 हजार रुपये लिए, एसीबी की टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से रिश्वत के नोट बरामद हुए और केमिकल टेस्ट में हाथों के रंग धुलाने की पुष्टि हुई।
एसीबी की महानिरीक्षक एस परिमला के सुपरविजन में आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई के बाद पंचायत समिति परिसर और आसपास के सरकारी कार्यालयों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। राजस्थान के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में स्थानीय निकायों और पंचायत समितियों में रिश्वतखोरी की शिकायतें आम हैं।
सरकारी विकास कार्यों के पूरा होने के बावजूद भुगतान अटकने से ठेकेदारों और मजदूरों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। इस गिरफ्तारी ने पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दिखाया है कि निचले स्तर पर बिना रिश्वत काम कराना कितना मुश्किल है।
एसीबी की त्वरित कार्रवाई से भरतपुर के ठेकेदारों और आम नागरिकों में उम्मीद जगी है कि वे बिना डर भ्रष्ट अधिकारियों की शिकायत कर सकते हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आमजन और सरकारी कर्मचारियों के लिए गाइडलाइन भी जारी की है। यदि किसी के खिलाफ कोई प्रकरण या शिकायत दर्ज होती है, तो वह व्यक्ति सीधे एसीबी कार्यालय में संपर्क कर अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
एसीबी ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर होती है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और उन्हें पूरी सहायता दी जाएगी।
नागरिक 24 घंटे टोल फ्री नंबर 1064 पर कॉल कर सकते हैं और व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 94135-02834 पर मैसेज भेजकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सहायक अभियंता किस आधार पर रिश्वत मांग रहा था?
- वह विकास कार्यों के प्रमाण पत्र सत्यापित करने के एवज में पैसा मांग रहा था।
- एसीबी शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करती है?
- शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है और उन्हें पूरी सहायता प्रदान की जाती है।
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