इंटरनेट पर शुगर की फर्जी दवा बेचने वाला गिरोह पकड़ा
बरेली में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर किया भंडाफोड़
बरेली पुलिस ने इंटरनेट पर शुगर ठीक करने की फर्जी दवा बेचने वाले तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। आरोपितों ने फर्जी वेबसाइट और काल सेंटर चलाकर नकली दवाएं बेचकर धोखा दिया। इसके अलावा, गुजरात पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े एक अंतरराज्यीय गिरोह का भी भंडाफोड़ किया है।
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जागरण संवाददाता। बरेली पुलिस ने रविवार को इंटरनेट पर शुगर ठीक करने की फर्जी दवा बेचने वाले गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया। आरोपितों के पास नकली दवाओं की पैकिंग और बिक्री का लाइसेंस नहीं था। पुलिस ने बताया कि गिरोह के दो अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस के अनुसार, भोजीपुरा निवासी साजिद मलिक ने शुगर के मरीजों को निशाना बनाकर ठगी का जाल बुना था। उसने और उसके साथियों इस्लाम व मोहम्मद जफर ने इंटरनेट मीडिया पर दवा के विज्ञापन के जरिए लोगों को फंसाया। जरूरतमंदों ने वेबसाइट पर आर्डर किया तो आरोपितों ने नकली दवाएं भेज दीं।
गिरोह ने फर्जी वेबसाइट और काल सेंटर बनाया था। सैलानी में यादगार रेस्टोरेंट के पास मकान में नकली दवाओं की पैकिंग और डिलीवरी होती थी। वहां 75 डिब्बों में दवाएं भरी मिलीं, जिन पर नाम लिखा था लेकिन निर्मित होने का वर्ष नहीं था।
आरोपित कुछ दुकानों से जड़ी-बूटियां व गोलियां लेकर पैकिंग कराते थे। उनकी पैकिंग पर आरके इंटरप्राइजेज, डियाबो-वीटा केयर, अयूर लाइफ और हमदम फार-ऐवर इंडिया जैसे नाम छपवाए गए थे, जो सभी फर्जी कंपनियां थीं।
साजिद, रऊफ और रिजवान ने कंपनी बनाई थी। नकली दवा बनाने और पैकिंग का काम रऊफ व रिजवान देखते थे, जबकि इस्लाम इंटरनेट मीडिया पर प्रचार करता था। दवा की कीमत 1000 से 1450 रुपये के बीच बताई जाती थी ताकि लोग आसानी से खरीद सकें।
पुलिस ने बताया कि गिरोह के पांचों सदस्यों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। रविवार को छापेमारी कर साजिद, इस्लाम और मोहम्मद जफर को गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब रऊफ और रिजवान की तलाश कर रही है।
इस बीच गुजरात पुलिस के साइबर केंद्र ने बम धमकी वाले ईमेल भेजने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भी भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बिहार के भागलपुर से रोशन कुमार भूमिहार उर्फ राय और झारखंड के देवघर से गुलशन कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों के पास 5 लाख 13 हजार 847 ईमेल खातों और पासवर्ड की सूची मिली है। 10 सितंबर को गुजरात सरकार के विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के ईमेल पर धमकी भरा संदेश आया था, जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्य विधानसभा, प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री और हाल में हुए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत का समर्थन करने वाले देशों को निशाना बनाया गया था।
तकनीकी जांच से पता चला कि यह ईमेल भागलपुर से भेजा गया था। पूछताछ में रोशन कुमार ने बताया कि उसे ईमेल खाता गुलशन कुमार ने उपलब्ध कराया था। पुलिस इस गिरोह के बांग्लादेश से जुड़े लोगों से आर्थिक मदद मिलने और लेनदेन में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की भी जांच कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गिरोह ने नकली दवाएं कैसे बनाई?
- आरोपित कुछ दुकानों से जड़ी-बूटियां व गोलियां लेकर पैकिंग कराते थे और फर्जी कंपनी के नाम से पैकिंग करते थे।
- अभी फेक दवा गिरोह के कितने सदस्य गिरफ्तार नहीं हुए?
- रऊफ और रिजवान की पुलिस अब भी तलाश कर रही है।
- गुजरात पुलिस ने बम धमकी ईमेल किसने भेजा था?
- भागलपुर के रोशन कुमार भूमिहार और देवघर के गुलशन कुमार सिंह ने धमकी वाले ईमेल भेजे थे।
- धमकी ईमेल किसकी तरफ से भेजे गए थे?
- धमकी ईमेल गुजरात सरकार के विधायी विभाग के ईमेल पर 10 सितंबर को भेजे गए थे।
- पुलिस बम धमकी गिरोह के आर्थिक लेनदेन की क्या जांच कर रही है?
- पुलिस इस गिरोह के बांग्लादेश से आर्थिक मदद और क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
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