झालावाड़ में निकाय चुनाव में कांग्रेस-भाजपा को मिली चुनौती
निर्दलीय और आम आदमी पार्टी ने कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय बनाया
झालावाड़ जिले में 9 और 11 सितंबर को निकाय चुनाव होंगे, जिसमें कांग्रेस और भाजपा को निर्दलीय तथा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। परिसीमन के बाद कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला हो रहा है और जातीय समीकरणों के कारण चुनावी लड़ाई कठिन हुई है। दोनों प्रमुख दलों ने जीत का दावा किया है, लेकिन अंतिम परिणाम स्थानीय समीकरण और व्यक्तिगत संपर्क पर निर्भर होगा।
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झालावाड़। झालावाड़ जिले में 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में निकाय चुनाव होने हैं। इस बार कांग्रेस और भाजपा के सामने निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने कई वार्डों में कड़ी चुनौती पेश की है। इससे दोनों प्रमुख दलों के लिए जीत आसान नहीं मानी जा रही।
झालावाड़ शहर समेत जिले के 43 वार्डों में चुनाव का माहौल गली-गली नजर आ रहा है। पहले 45 वार्ड थे, लेकिन परिसीमन के बाद दो वार्ड कम हो गए हैं। कई वार्डों में निर्दलीय और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस-भाजपा के सामने त्रिकोणीय मुकाबला कर रहे हैं। इससे पारंपरिक वार्डों में भी जीत की राह कठिन हो गई है।
कई वार्डों में जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए निर्दलीय प्रत्याशियों ने मैदान में उतरकर दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। एक ही जाति के उम्मीदवारों के आमने-सामने होने से वोटों का बंटवारा होने की आशंका है, जिसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है।
जिन वार्डों में निर्दलीय नहीं हैं, वहां आम आदमी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। इससे कई सीटों पर मुकाबला सीधे भाजपा-कांग्रेस के बीच न रहकर त्रिकोणीय हो गया है।
झालावाड़ में सभापति पद ओबीसी के लिए आरक्षित है, इसलिए अध्यक्ष पद को लेकर भी चुनावी रणनीति इसी सामाजिक समीकरण के इर्द-गिर्द तैयार की जा रही है। यह क्षेत्र भाजपा का गढ़ माना जाता है और पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र भी रहा है।
पिछले चुनावों में कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला एकतरफा रहा, लेकिन इस बार परिसीमन के बाद समीकरण बदले हैं। मुस्लिम बहुल वार्डों में कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक रहा है, लेकिन नए परिसीमन से दोनों दलों के पुराने समीकरण प्रभावित हुए हैं।
वार्ड 5 में भाजपा के प्रदीप सिंह राजावत और वार्ड 7 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। वार्ड 31 में कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के बाद भाजपा के सामने आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी है।
प्रचार के लिए समय कम बचा है, इसलिए उम्मीदवार और उनके समर्थक देर रात तक जनसंपर्क में लगे हैं। प्रचार पर रोक लगने के बाद घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करना मुख्य विकल्प रहेगा। अंतिम समय में व्यक्तिगत संपर्क और स्थानीय समीकरण चुनाव परिणाम में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इस चुनाव में दोनों प्रमुख दलों के सामने बाहरी चुनौती के साथ भीतरघात का खतरा भी है। भाजपा और कांग्रेस ने ज्यादातर वार्डों में नए चेहरों पर दांव लगाया है, लेकिन टिकट कटने से नाराजगी भी बनी है।
कुछ प्रभावशाली निर्दलीय दावेदारों को समझौते से चुनाव मैदान से हटाया गया, लेकिन कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत बताते हुए जिले की सभी आठ निकायों में जीत का दावा कर रही है। तीन नई बनी निकायों में भी लोग बदलाव चाहते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा ने भी सभी निकायों में भाजपा की जीत का दावा किया है।
इस बार भाजपा और कांग्रेस ने कुछ ही पुराने दावेदारों को दोबारा मौका दिया है। कांग्रेस की ओर से फारूक अहमद, अतीक अहमद की पत्नी ऋचा, नफीस, राजीव कुमार, अकबर खान, अंजना बेरवा, प्रियंका मीणा, मनोज राजपाल, नेहा शर्मा और परमानंद को प्रत्याशी बनाया गया है।
भाजपा की ओर से राजेंद्र सुमन, निर्विरोध निर्वाचित प्रदीप सिंह राजावत, कमल कश्यप, हेमराज कश्यप, बलवीर प्रजापति, रईस चौधरी, इनाम जफर और सागर कश्यप को टिकट मिला है।
चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के पास बड़ी संख्या में आवेदन आना इस बात का संकेत है कि आमजन भाजपा सरकार से त्रस्त है
वीरेंद्र सिंह गुर्जर
पार्टी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है
जिलाध्यक्ष
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनाव परिणामों को कैसे प्रभावित किया?
- निर्दलीय प्रत्याशियों के कारण जातीय समीकरण बदल गए हैं, जिससे वोटों का बंटवारा होने की आशंका बढ़ी है।
- आम आदमी पार्टी की भूमिका इस चुनाव में क्या है?
- जहां निर्दलीय प्रत्याशी नहीं हैं, वहां आम आदमी पार्टी ने सीधे मुकाबला किया है, जिससे कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हुआ है।
- क्या कोई वार्ड पहले से निर्विरोध चुना गया है?
- हाँ, वार्ड 5 में भाजपा के प्रदीप सिंह राजावत और वार्ड 7 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।
- प्रचार अभियान का क्या स्वरूप रहने वाला है?
- प्रचार पर रोक के बाद उम्मीदवार घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करेंगे, जिससे अंतिम समय में लोकल समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
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