सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को मोटर वाहन अपराधों पर अध्यादेश स्पष्ट करने को कहा
अपराधों को खत्म नहीं माना जाएगा, मुकदमे फिर से शुरू होंगे, संवैधानिकता पर बहस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मोटर वाहन अधिनियम के गंभीर और गैर समझौता योग्य अपराधों के मामलों को खत्म न मानने के लिए अध्यादेश जारी कर स्पष्टता देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों को पहले खत्म माना गया था, उनमें मुकदमे पुनः शुरू किए जाएं। सरकार ने ऐसे मामलों की पहचान के लिए एक प्रक्रिया शुरू की है।
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डिजिटल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत गंभीर और गैर समझौता योग्य अपराधों के मामलों को खत्म नहीं माना जाने के लिए अध्यादेश जारी कर स्पष्टता देने का निर्देश दिया है।
अध्यादेश और मुकदमों की स्थिति
उत्तर प्रदेश सरकार ने 31 दिसंबर, 2021 तक लंबित मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराधों के मुकदमों को खत्म करने का प्रस्ताव दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए और कहा कि गैर समझौता योग्य अपराध, जिनमें अनिवार्य जेल की सजा होती है और बार-बार किए गए अपराधों के मुकदमे खत्म नहीं माने जाएंगे। इसके लिए सरकार ने 2026 में अध्यादेश भी जारी किया है।
सरकार की प्रक्रिया और कोर्ट की मांग
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार एक और अध्यादेश जारी करे जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि जिन मामलों को पहले खत्म माना गया था, उनमें मुकदमे फिर से शुरू किए जाएंगे।
संवैधानिक वैधता और बहस
अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने कहा कि इस कानून की संवैधानिकता का मुद्दा अभी भी बना हुआ है और संशोधन का कोई सार्थक उद्देश्य तब तक पूरा नहीं होगा जब तक संवैधानिक जांच न हो। कोर्ट ने कहा कि यदि राज्य ऐसे मामलों से निपटने का समाधान निकालता है तो संवैधानिक वैधता की जांच की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार ने ऐसे मामलों की पहचान करने के लिए एक प्रक्रिया शुरू की है
सरकारी वकील
अध्यादेश में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन अपराधों को कभी भी खत्म नहीं माना गया
जस्टिस केवी विश्वनाथन, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अगर मुकदमे पहले खत्म माने जा चुके हैं तो क्या होगा?
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, जिन मामलों को पहले खत्म माना गया था, उनमें मुकदमे फिर से शुरू किए जाएंगे।
- यह अध्यादेश राज्य सरकार के लिए क्यों जरूरी है?
- यह अध्यादेश यह स्पष्ट करने के लिए जरूरी है कि गंभीर मोटर वाहन अपराधों के मामले कभी समाप्त नहीं माने जाएंगे, जिससे कानून का सही क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
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