बालाघाट में 30 से अधिक बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया
नवजात की मौत पर सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज की सुविधाओं पर भी सवाल उठाए गए
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों के कारण 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने अस्पतालों में सुविधाओं और उपचार की कमी पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, वहीं लखनऊ हाईकोर्ट ने सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए अस्पतालों की व्यवस्थाओं की जांच का आदेश दिया है। अगली सुनवाई 11 सितंबर को होगी।
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डिजिटल डेस्क। बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुल्तानपुर के नए मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत पर भी कोर्ट ने सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए हैं।
बालाघाट में बच्चों की मौत पर हाईकोर्ट की कार्रवाई
नरसिंहपुर निवासी अंशुल तिवारी ने बालाघाट में बच्चों को पर्याप्त उपचार न मिलने की शिकायत पर जनहित याचिका दायर की थी। युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई में कहा कि केवल समाचार पत्रों की खबरों के आधार पर याचिका उचित नहीं है, इसलिए प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। याचिकाकर्ता ने क्षेत्र का दौरा कर रिपोर्ट खंडपीठ के समक्ष पेश की, जिसमें अस्पताल में 50 बिस्तरों के बावजूद करीब 400 बच्चों के उपचार का उल्लेख था। रिपोर्ट में हैंडपंप से पीला पानी निकलने, पोषण आहार न मिलने और गंदगी की स्थिति भी बताई गई। मौतों के बाद प्रशासन ने अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार शुरू किया है। कोर्ट ने रिपोर्ट को याचिका का हिस्सा बनाने के निर्देश दिए हैं।
सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज में नवजात की मौत पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
लखनऊ उच्च न्यायालय ने सुल्तानपुर के राजकीय स्वायत्त मेडिकल कॉलेज में जन्मे नवजात की मौत पर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी से निपटने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और उपकरण उपलब्ध होना आवश्यक हैं। नवजात को वेंटिलेटर, ऑक्सीजन युक्त बेड और बाल रोग सर्जन की जरूरत थी, जो उपलब्ध नहीं थे। नवजात को बेहतर इलाज के लिए केजीएमयू, राम मनोहर लोहिया और एसजीपीजीआई भेजा गया, लेकिन वहां भी बेड उपलब्ध नहीं था। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर चिंता जताई और अन्य मेडिकल कॉलेजों की सुविधाओं की जांच का आदेश दिया। अगली सुनवाई 11 सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी, जिसमें संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने को कहा गया है।
आदेश के पालन में क्षेत्र का दौरा किया गया
अतुल शुक्ला
कोर्ट को सरकारी तंत्र के इस असंवेदनशील रवैये पर संज्ञान लेना चाहिए.
याची
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अस्पताल में पानी और स्वच्छता की स्थिति क्या थी?
- रिपोर्ट में अस्पताल से हैंडपंप के जरिए पीला पानी निकलना और गंदगी की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है।
- सरकार ने बच्चों की मौत के बाद क्या कदम उठाए हैं?
- मौतों के बाद प्रशासन ने अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार शुरू किया है।
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