सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया
14 साल से कम उम्र के बच्चों की शिक्षा संस्थानों के पंजीकरण और निगरानी पर आदेश का पालन नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण और निगरानी संबंधी आदेशों का पालन न करने पर केंद्रीय शिक्षा सचिव टीके अनिल कुमार को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने सचिव को चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है और आगामी सुनवाई निर्धारित की है।
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 14 साल से कम उम्र के बच्चों को धार्मिक या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा देने वाले संस्थानों के पंजीकरण और निगरानी के लिए आदेशों का पालन न करने पर केंद्रीय शिक्षा सचिव टीके अनिल कुमार को अवमानना का नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि तीन महीने की समय सीमा बीत जाने के बाद भी शिक्षा मंत्रालय ने कोई निर्णय नहीं लिया।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला सीधे तौर पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट से जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अवमानना कार्यवाही का मकसद पूर्व आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना है, न कि नए संवैधानिक मुद्दों पर विचार करना। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों का अनिवार्य पंजीकरण और निगरानी के लिए स्पष्ट फ्रेमवर्क बनाया जाए।
पीठ ने केंद्रीय शिक्षा सचिव को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और सुनवाई चार हफ्ते बाद निर्धारित की गई है। अदालत ने सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है। याचिका में आरोप है कि शिक्षा सचिव ने प्रतिवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की।
इससे पहले, उच्च न्यायालय ने ग्राम पंचायत गठन में नियमों की अनदेखी पर कड़ी टिप्पणी की है। बहराइच के डिहवा खुर्द गांव को चहलर पंचायत में शामिल करने के मामले में हाई कोर्ट ने कहा कि शासनादेश के अनुसार ग्राम पंचायत में शामिल करते समय दूसरी पंचायत का क्षेत्र नहीं आना चाहिए। कोर्ट ने सभी संबंधित नियमों को साथ लागू करने पर जोर दिया और विशेष सचिव को पांच अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को विशेष सचिव को राज्य सरकार का पक्ष रखने और हलफनामे का परीक्षण करने का मार्गदर्शन देने को कहा गया है। कोर्ट ने याचिका खारिज करने वाले निदेशक पंचायती राज के आदेश को तथ्यात्मक और कानूनी आधार से रहित बताया।
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि शिक्षा मंत्रालय को आदेशों का सख्ती से पालन करना होगा और बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों में नियमन को प्रभावी बनाना आवश्यक है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना आवश्यक है?
- सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दी है।
- हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायत गठन में क्या कहा?
- हाई कोर्ट ने ग्राम पंचायतों के गठन में शासनादेश और नियमों का कड़ाई से पालन करने पर जोर दिया है।
- अपर मुख्य सचिव पंचायती राज को क्या निर्देश दिए गए हैं?
- उन्हें राज्य सरकार का पक्ष रखने और हलफनामे का परीक्षण करने का मार्गदर्शन देने को कहा गया है।
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश शिक्षा मंत्रालय पर क्या प्रभाव डालेगा?
- यह शिक्षा मंत्रालय को आदेशों का सख्ती से पालन और बच्चों की शिक्षा की निगरानी प्रभावी रूप से करने को बाध्य करेगा।
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