कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क पर केंद्र सरकार पर लगाया आरोप
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अमेरिकी दबाव में टैक्स लगाने का आरोप लगाया
कांग्रेस ने यूपीआई डिजिटल लेन-देन पर केंद्र सरकार द्वारा शुल्क लगाने की योजना पर आरोप लगाए हैं और इसे आम जनता पर नया डिजिटल टैक्स बताया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि ₹2,000 तक के यूपीआई लेन-देन पर शुल्क नहीं लगेगा और शुल्क केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होगा। हालांकि, ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर भविष्य में शुल्क लगाने की संभावना बनी हुई है।
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केंद्र सरकार के हालिया नोटिफिकेशन के बाद यूपीआई से होने वाले डिजिटल लेन-देन पर शुल्क को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी कंपनियों के दबाव में टैक्स लगाने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने कहा कि ₹2,000 से ऊपर के लेन-देन पर टैक्स से आम जनता को नुकसान होगा।
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा में आरोप लगाया कि सरकार ने चोर दरवाजे से यूपीआई पेमेंट्स पर टैक्स लगाने की योजना बना ली है। उन्होंने कहा, "भले ही ₹2,000 से बड़े लेन-देन की संख्या कुल आंकड़ों का केवल 5 प्रतिशत हो, लेकिन वैल्यू के हिसाब से कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं से आता है।" राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी सरकार की नीयत पर सवाल उठाए।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे महंगाई की मार झेल रही जनता पर नया 'डिजिटल टैक्स' करार दिया। उन्होंने कहा, "दस साल पहले नोटबंदी का झटका देकर कहा गया था कि डिजिटल और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जा रहा है। वित्त मंत्री ने संसद में वादा किया था कि यूपीआई फ्री रहेगा, लेकिन अब ₹5,000 के लेन-देन पर ₹25 और ₹10,000 पर ₹50 तक वसूलने की रिपोर्ट सामने आ रही हैं। जनता की बची-कुची बचत को खत्म करने का पूरा प्लान तैयार है।"
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने याद दिलाया कि पार्टी ने 6 अगस्त 2026 को ही इस खतरे से आगाह किया था। उन्होंने कहा, "सरकार ने ₹2,000 से कम के भुगतानों को तो सुरक्षित किया है, लेकिन उससे ऊपर के लेन-देन पर कोई सुरक्षा नहीं दी है। कल को दूसरा नोटिफिकेशन जारी करके यह सीमा भी खत्म की जा सकती है। आम लोगों के P2P यानी एक-दूसरे को भेजे जाने वाले पैसों पर भी कल को चार्ज लग जाए तो अचरज नहीं होगा। क्या यह सब राष्ट्रपति ट्रंप को खुश करने और अमेरिकी कंपनियों के लिए रास्ता साफ करने के लिए हो रहा है?"
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि 14 सितंबर के नोटिफिकेशन से ₹2,000 तक के यूपीआई लेन-देन और रुपे डेबिट कार्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, "भ्रम फैलाने से पहले सच समझें। एमडीआर केवल दुकानदारों और व्यापारियों पर लागू होता है, आम यूजर या ग्राहकों पर नहीं। इससे मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने सिस्टम को सुरक्षित, मजबूत और हाईटेक बनाने में करेंगी। इसका फायदा घूम-फिरकर यूपीआई इस्तेमाल करने वाले हर यूजर को ही मिलेगा।"
वित्त मंत्रालय के 14 सितंबर के राजपत्र नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोई बैंक या भुगतान प्रणाली प्रदाता ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान या रुपे डेबिट कार्ड से किए गए भुगतान पर सीधे या परोक्ष रूप से शुल्क नहीं लगा सकता। इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 यूपीआई की नई अधिकतम सीमा बन गई है। नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट यूपीआई भुगतान को शुल्क-मुक्त रखने की बात नहीं कही गई है। भविष्य में ऐसे भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लगाने की गुंजाइश बनी है, लेकिन अभी इसकी दर तय नहीं हुई है और न ही यह तय है कि किन कारोबारियों पर इसे लागू किया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस यूपीआई शुल्क पर सरकार को क्यों आरोपित कर रही है?
- कांग्रेस का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों के दबाव में सरकार आम जनता पर टैक्स लगा रही है।
- ₹2,000 से ऊपर के लेन-देन पर शुल्क कब लागू होगा?
- वर्तमान में इसकी दर तय नहीं हुई है और लागू होने की तारीख भी स्पष्ट नहीं है।
- कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क पर पहले कब आगाह किया था?
- कांग्रेस ने इस खतरे की जानकारी 6 अगस्त 2026 को दी थी।
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