कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के प्रारूप पर उठाए गंभीर सवाल
गोवा, यूपी, पंजाब और उत्तराखंड में 1 दिसंबर से जनगणना शुरू होगी, 16 नवंबर से सेल्फ एन्युमरेशन
कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जातिगत जनगणना के प्रारूप में विसंगतियां बताकर सुधार की मांग की है और इसे पिछड़ा वर्ग के साथ छलावा बताया है। जनगणना 1 दिसंबर 2026 से गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाकों में शुरू होगी, जिसमें डिजिटल तकनीक और सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा शामिल है।
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जागरण संवाददाता। कांग्रेस ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जातिगत जनगणना के प्रारूप पर गंभीर आपत्तियां जताईं हैं। पार्टी ने इसे पिछड़ा वर्ग के साथ छलावा बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है। जनगणना 2027 के लिए गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाकों में 1 दिसंबर से आबादी की गिनती शुरू होगी।
कांग्रेस प्रवक्ता चित्रा बाथम ने कहा, "प्रारूप की विसंगतियों से साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार वास्तविक जातिगत जनगणना कराने से बच रही है।" उन्होंने बताया कि प्रारूप में जाति के लिए पूरी तरह खुला विकल्प दिया गया है, जिससे अनगिनत उपजातियां और गोत्र दर्ज हो जाएंगे और किसी जाति की वास्तविक संख्या तय करना असंभव हो जाएगा। इससे पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी संसाधनों और कल्याणकारी योजनाओं का न्यायपूर्ण बंटवारा बाधित होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस किसी भी स्थिति में ओबीसी समाज के हकों के साथ समझौता नहीं होने देगी।
कांग्रेस की मांग और प्रतिक्रिया
पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार को औपचारिक पत्र भेजकर इस प्रारूप में तत्काल सुधार की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने खामियों को दूर नहीं किया, तो राहुल गांधी सामाजिक न्याय की लड़ाई संसद से लेकर सड़क तक लड़ेंगे। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा, "कांग्रेस 2021 से ही सही तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग कर रही है।" उन्होंने बताया कि मौजूदा प्रश्नावली में करीब 40 सवाल हैं और प्रश्न संख्या 10 से ही इसकी खामी सामने आती है।
जनगणना की तारीखें और प्रक्रिया
भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड के गैर-बर्फीले इलाकों में जनगणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक की जाएगी। इसके पहले 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज कराने या सेल्फ एन्युमरेशन का विकल्प चुन सकेंगे। इसके बाद 5 जनवरी से 9 जनवरी 2027 तक जानकारी की दोबारा जांच की जाएगी। बर्फबारी वाले नॉन-सिंक्रोनस इलाकों के लिए रेफरेंस तारीख 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
जनगणना के राजनीतिक और तकनीकी पहलू
रजिस्ट्रार जनरल ने बताया कि जिन राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां जनगणना की प्रक्रिया पहले शुरू की जा रही है। इस बार डिजिटल तकनीक और सेल्फ-एन्यूमरेशन जैसी सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, न ही RTI के तहत उपलब्ध कराई जाएगी और न ही किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर इस्तेमाल होगी।
न्यायालय का स्पष्टीकरण
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब किसी व्यक्ति की नागरिकता खत्म हो जाना नहीं है। यह स्पष्टीकरण जनगणना और मतदाता सूची के बीच अंतर को समझाने के लिए दिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के प्रारूप में क्या आपत्तियां जताई हैं?
- कांग्रेस का कहना है कि जाति के लिए खुला विकल्प अनगिनत उपजातियां दर्ज कराएगा, जिससे वास्तविक आंकड़े तय करना मुश्किल होगा।
- जनगणना 2027 की प्रक्रिया क्या होगी?
- जनगणना 16 नवंबर से 30 नवंबर तक सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प उपलब्ध रहेगा, और 5 जनवरी से 9 जनवरी तक पुनः जांच की जाएगी।
- कोर्ट ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर क्या स्पष्ट किया है?
- कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटना नागरिकता खत्म होने का प्रमाण नहीं है।
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