राजस्थान निकाय चुनाव में बसपा के 19 पार्षद जीते, निर्दलीय बने किंगमेकर
बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी, कांग्रेस को शिकस्त, कई जगह निर्दलीयों का दबदबा
राजस्थान निकाय चुनाव में बीजेपी ने 4,179, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्डों में जीत हासिल की है। बहुजन समाज पार्टी के 19 पार्षद भी चुने गए हैं, जबकि कई नगर निगमों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला, जिससे निर्दलीयों की भूमिका निर्णायक बनी है।
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जयपुर। राजस्थान के 10,245 वार्डों में से 10,205 के नतीजे घोषित हो चुके हैं। इन नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 वार्ड और निर्दलीयों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की है। बहुजन समाज पार्टी के 19 पार्षद भी जीतकर उभरे हैं। चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका बोर्ड गठन में निर्णायक होगी।
चुनाव परिणाम और निर्दलीयों की भूमिका
राजस्थान के 309 नगरीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरते हुए कांग्रेस को शिकस्त दी है। हालांकि कई नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में दोनों दल बहुमत से दूर रहे। ऐसे में मेयर, सभापति और पालिका अध्यक्ष के चुनाव में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है। कई जगह सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में है।
बीजेपी ने 4,167 वार्डों में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस के खाते में 3,603 वार्ड आए हैं। निर्दलीयों ने 2,265 वार्डों में जीत हासिल की है। इसके अलावा रालोपा ने 63 और आम आदमी पार्टी ने 42 सीटों पर कब्जा जमाया है।
कई नगर निगमों में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला है, जिससे बोर्ड गठन में निर्दलीयों का समर्थन निर्णायक होगा। जयपुर स्थित बीजेपी कार्यालय में जीत का जश्न मनाया गया, जहां मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पगड़ी पहनाकर मुंह मीठा कराया गया। मुख्यमंत्री ने चुनाव की पूरी कमान संभाली और इसे अपने कार्यकाल का जनमत संग्रह बताया।
क्षेत्रीय परिणाम और राजनीतिक प्रभाव
बीजेपी के कई दिग्गज नेता अपने गृह क्षेत्रों में पार्टी को बहुमत नहीं दिला सके। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के गृह जिले झालावाड़ के अंतर्गत बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के गृह क्षेत्र अटरू में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा।
प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में बीजेपी बहुमत से दूर रही। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के संसदीय क्षेत्र बीकानेर में कांग्रेस बहुमत में आई। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के अलवर, गजेंद्र सिंह शेखावत के जोधपुर और कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के अजमेर संसदीय क्षेत्र में भी बीजेपी बहुमत हासिल नहीं कर सकी।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने गृह क्षेत्र जोधपुर में कांग्रेस को अपने वार्ड तक में जीत नहीं दिला सके, जबकि सचिन पायलट टोंक में परिषद बोर्ड बनाने में सफल रहे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में भी निर्दलीयों ने बीजेपी और कांग्रेस से अधिक सीटें जीती हैं।
बसपा के प्रदर्शन और मायावती के बयान
बहुजन समाज पार्टी ने राजस्थान निकाय चुनाव में 19 सीटों पर जीत दर्ज की है। बसपा प्रमुख मायावती ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई दी है। उन्होंने कहा, "हालांकि इससे पहले पंजाब सहित देश के कुछ अन्य राज्यों में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का अच्छा प्रदर्शन रहा है।"
मायावती ने उम्मीद जताई कि आगे होने वाले विधानसभा और लोकसभा आम चुनावों में ये सभी लोग पार्टी का बेहतर परिणाम लाने में योगदान देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कई सीटों पर बसपा प्रत्याशियों को साजिश के तहत हराया गया।
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में बीजेपी बहुमत से दूर रही। मायावती ने पार्टी के छोटे-बड़े सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को चुनाव में किए गए प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दीं।
राजस्थान की जनता-जनार्दन ने बीजेपी को समर्थन देकर विश्वास जताया है।
प्रधानमंत्री मोदी
डबल इंजन सरकार सुशासन और जनसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाएगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निर्दलीयों की भूमिका आगामी बोर्ड गठन में क्यों महत्वपूर्ण है?
- क्योंकि कई नगर निगमों और परिषदों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, इसलिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मेयर और अन्य पदों के चुनाव में निर्णायक होगा।
- बीजेपी की जीत पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने चुनाव की पूरी कमान संभाली और इसे अपने कार्यकाल का जनमत संग्रह बताया।
- बसपा प्रमुख मायावती ने चुनाव परिणाम पर क्या कहा?
- मायावती ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को बधाई दी और उम्मीद जताई कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में उनका प्रदर्शन बेहतर रहेगा।
- क्या प्रदेश के सभी राजनीतिक दिग्गजों को अपने गृह क्षेत्रों में सफलता मिली?
- नहीं, कई दिग्गज नेता जैसे पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मदन राठौड़ अपने गृह क्षेत्र में पार्टी को बहुमत नहीं दिला सके।
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