भाजपा ने निकाय चुनावों में बढ़त बनाई, कांग्रेस कमजोर रही
जयपुर सहित कई जिलों में भाजपा ने वार्डों पर कब्जा कर बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंची
राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा ने कई जिलों में बढ़त बनाई है, जबकि कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा है और कई बड़े नेता अपने वार्ड हार गए हैं। भाजपा ने जयपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा सहित अन्य नगर पालिकाओं में महत्वपूर्ण सीटें हासिल की हैं, लेकिन कई जगहों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टीयों के लिए कुछ क्षेत्रों में गठबंधन या समर्थन की आवश्यकता बनी हुई है।
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जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनावों में भाजपा ने कई जिलों में मजबूत पकड़ बनाई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की रणनीति से भाजपा करीब 15 वार्डों की मतगणना में बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा और कई बड़े नेता अपने वार्ड हार गए।
भाजपा की बढ़त और संगठन की भूमिका
भाजपा ने जयपुर सहित उदयपुर, भीलवाड़ा और उच्चैन नगर पालिका में मजबूत स्थिति बनाई है। उदयपुर निगम में 80 में से 53 और भीलवाड़ा में 70 में से 45 वार्ड जीतकर भाजपा बोर्ड बनाने के करीब पहुंच गई है। उच्चैन नगर पालिका में भाजपा ने 11 सीटों पर जीत हासिल की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संगठनात्मक कौशल का परिचय देते हुए रात 3:30 बजे से 4 बजे तक बैठकें लीं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नेताओं से जुड़े रहे। भाजपा के करीब 10 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी अपने वार्ड में हार गए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के पाली क्षेत्र में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। भरतपुर निगम में भाजपा को बहुमत नहीं मिला, जहां निर्दलीय के सहारे मेयर बनाया जा सकता है।
कांग्रेस और अन्य पार्टियों का प्रदर्शन
कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा और कई बड़े नेता अपने वार्ड हार गए। पूर्व सीएम अशोक गहलोत, पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कांग्रेस के चार बड़े नेता अपने वार्ड नहीं बचा पाए। झालावाड़ में कांग्रेस ने जीत हासिल की जबकि टोंक में भाजपा को हार मिली।
आप पार्टी ने बारां नगर परिषद में 60 में से 31 वार्डों में जीत हासिल की है। अजमेर निगम में कांग्रेस 37 और भाजपा 32 वार्डों पर जीत दर्ज कर चुकी है। सिरोही में कांग्रेस का बोर्ड बनने की संभावना है। आबूरोड नगर पालिका में त्रिशंकु हालात हैं, जहां भाजपा 20, कांग्रेस 16 और 4 निर्दलीय जीत चुके हैं।
चुनावी नतीजों के बाद कांग्रेस खेमे में जश्न का माहौल है, जबकि भाजपा में हार के कारणों पर मंथन शुरू हो गया है। पार्टी के भीतर टिकट वितरण और संगठन की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
निर्दलीय और अन्य तथ्य
निर्दलीयों ने 65 वार्डों में से 36 वार्डों में जीत दर्ज की है। भाजपा 20 सीटों के साथ दूसरे और कांग्रेस 7 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही। अब नजरें 11 सीटों पर जीत चुके निर्दलीयों पर टिकी हैं।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के क्षेत्र अलवर और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के क्षेत्र कोटा में भाजपा बहुमत के करीब है, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
चुनाव परिणामों के बाद जीत के बाद कांग्रेस के निर्वाचित पार्षद निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने एक साथ पहुंचे।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संगठनात्मक कौशल से भाजपा की जीत सुनिश्चित की।
भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नतीजों के बाद भाजपा और कांग्रेस में कैसा माहौल है?
- कांग्रेस के खेमे में जश्न का माहौल है जबकि भाजपा में हार के कारणों पर चर्चा और मंथन चल रहा है।
- भाजपा को कहा-कहाँ हार का सामना करना पड़ा?
- भाजपा को भरतपुर निगम में बहुमत नहीं मिला और पाली क्षेत्र में भी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
- निर्दलीयों ने चुनावों में क्या प्रदर्शन किया?
- निर्दलीयों ने 65 वार्डों में से 36 वार्डों में जीत दर्ज की है और अब भाजपा और कांग्रेस दोनों की नजरें निर्दलीयों के समर्थन पर टकी हैं।
- भजनलाल शर्मा ने पार्टी की जीत में कैसे योगदान दिया?
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संगठनात्मक कौशल दिखाते हुए बैठकें लीं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नेताओं से जुड़े रहे, जिससे भाजपा की जीत सुनिश्चित हुई।
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