टोंक में तीन दिवसीय लक्की मेला ध्वज पूजन के साथ शुरू
राजस्थान सहित पांच राज्यों से करीब 5 लाख श्रद्धालु मेले में शामिल होंगे
टोंक जिले के निवाई में देवधाम जोधपुरिया में तीन दिवसीय लक्की मेले का शुभारंभ ध्वज पूजन के साथ हुआ। मेले में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से करीब 5 लाख श्रद्धालु शामिल होंगे। मेले के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रतिभा सम्मान समारोह और भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित किए जाएंगे।
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टोंक। टोंक जिले के निवाई में देवधाम जोधपुरिया में मंगलवार को तीन दिवसीय लक्की मेले का शुभारंभ ध्वज पूजन के साथ हुआ। मेले में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे। मंदिर परिसर को खास सजावट से सजाया गया है।
मंदिर प्रशासन ने मेले की तैयारियां करीब 15 दिन पहले शुरू कर दी थीं। उपखंड अधिकारी गंभीर सिंह ने बिजली, पानी और चिकित्सा सहित कई विभागों के 150 से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। ये कर्मचारी 24 घंटे अलग-अलग शिफ्ट में काम करेंगे और व्यवस्थाओं पर नजर रखेंगे।
ध्वज पूजन के बाद मंगलवार को प्रतिभा सम्मान समारोह भी शुरू हुआ, जिसमें विभिन्न श्रेणियों की 551 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। मेले के दौरान 16 सितंबर की रात सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और भामाशाह सम्मान समारोह भी आयोजित किया जाएगा।
17 सितंबर को भगवान देवनारायण को खीर-पुए का भोग लगाया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए करीब एक लाख लोगों के बैठने की क्षमता वाला डोम बनाया गया है। मेले में शामिल होने के लिए अलग-अलग स्थानों से भगवान देवनारायण के 2 हजार से अधिक ध्वज लेकर श्रद्धालु निवाई पहुंचेंगे। बड़ी संख्या में पैदल यात्री भी देर रात तक निवाई पहुंचेंगे।
ध्वज पूजन के बाद बुधवार सुबह श्रद्धालु पैदल यात्रा के रूप में देवधाम जोधपुरिया के लिए रवाना होंगे। मेले में राजस्थान सहित पांच राज्यों से करीब 5 लाख श्रद्धालु पहुंचने की संभावना है। मंदिर परिसर को खास सजावट से सजाया गया है।
भोपा घासीराम गुर्जर ने बताया कि भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को भगवान देवनारायण के नीलाघर घोड़े का जन्म हुआ था। इस आस्था के प्रमुख केंद्र पर हर वर्ष तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन और ध्वज लेकर आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- लक्की मेले का आयोजन क्यों किया जाता है?
- यह मेले भगवान देवनारायण के नीलाघर घोड़े के जन्म की आस्था से जुड़ा है।
- मेला में कौन-कौन से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे?
- 16 सितंबर की रात सांस्कृतिक कार्यक्रम और भामाशाह सम्मान समारोह आयोजित होंगे।
- मंदिर प्रशासन ने मेले की तैयारियों के लिए क्या कदम उठाए?
- 150 से अधिक कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है, जो बिजली, पानी और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं पर निगरानी रखेंगे।
- ध्वज पूजन के बाद श्रद्धालु क्या करेंगे?
- ध्वज पूजन के बाद श्रद्धालु बुधवार सुबह देवधाम जोधपुरिया की पैदल यात्रा बनाएंगे।
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