टोंक में बीजेपी ने मालपुरा-टोडारायसिंह में बढ़त बनाई
कन्हैयालाल चौधरी के क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा, कांग्रेस को टोंक नगर परिषद में बहुमत
कन्हैयालाल चौधरी के प्रभाव वाले क्षेत्र मे
टोंक जिले के नगरीय निकाय चुनाव में भाजपा ने मालपुरा, टोडारायसिंह, डिग्गी और लांबा हरसिंह में कई सीटें जीती हैं, जबकि कांग्रेस ने टोंक नगर परिषद में बहुमत हासिल किया है। राजस्थान में 10,167 वार्डों के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभाव दिखा है, जिसमें कुछ जिलों में निर्दलीय और नए दल भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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टोंक। टोंक जिले के नगरीय निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने मालपुरा, टोडारायसिंह, डिग्गी और लांबा हरसिंह में मजबूत जीत दर्ज की है। टोडारायसिंह में बीजेपी ने 35 में से 28 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने टोंक नगर परिषद में 59 में से 32 सीटें हासिल कर बहुमत बनाया।
कन्हैयालाल चौधरी के प्रभाव वाले क्षेत्र में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है।
मालपुरा-टोडारायसिंह विधानसभा क्षेत्र की चार निकायों में बीजेपी ने दमदार प्रदर्शन किया है। टोडारायसिंह में 35 सीटों में से 28 पर पार्टी ने कब्जा जमाया है। मालपुरा में 40 सीटों में से बीजेपी ने 22 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 6 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 12 सीटें मिलीं।
डिग्गी में बीजेपी ने 25 में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की है और लांबा हरसिंह में 20 सीटों में से 11 पर पार्टी ने जीत हासिल की। इन नतीजों से मालपुरा-टोडारायसिंह क्षेत्र में बीजेपी की स्थिति मजबूत होने का संकेत मिलता है।
टोंक नगर परिषद में कांग्रेस विधायक सचिन पायलट का दबदबा कायम रहा। यहां कांग्रेस ने 59 में से 32 सीटें जीतकर बहुमत बनाया है।
राजस्थान में दो चरणों में 10,167 वार्डों के लिए हुए मतदान में प्रदेश की जनता ने कहीं सत्ताधारी बीजेपी को एकतरफा समर्थन दिया है।
हालांकि, झालावाड़ और पाली जैसे जिलों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ जिले में कांग्रेस ने जोरदार बढ़त बनाई है। वहीं, पाली में कांग्रेस ने बीजेपी के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
भरतपुर और अजमेर जैसे बड़े शहरों में निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर बनकर उभरे हैं। भरतपुर नगर निगम में निर्दलीयों ने 36 वार्डों में जीत हासिल की है। यहां बीजेपी को 20 और कांग्रेस को 7 सीटें मिलीं। अजमेर नगर निगम में कांग्रेस को 37 और बीजेपी को 32 सीटें मिली हैं।
बारां में आम आदमी पार्टी ने एंट्री की है, जबकि केकड़ी में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी किंगमेकर बनी है।
राजस्थान के इन निकाय चुनाव परिणामों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए भविष्य का खाका तैयार कर दिया है। कोटा और उदयपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में बीजेपी का संगठन मजबूत नजर आया है, जबकि भरतपुर, पाली और झालावाड़ के नतीजों ने पार्टी को आत्मचिंतन करने पर मजबूर किया है।
आगामी पंचायत चुनावों से पहले सड़कों की खराब स्थिति और स्थानीय जनसमस्याओं को नजरअंदाज करना बीजेपी के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।
कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी का सियासी प्रभाव एक बार फिर मालपुरा-टोडारायसिंह क्षेत्र में नजर आया है। पार्टी ने लगातार सातवीं बार शानदार जीत दर्ज कर अपना दबदबा बरकरार रखा है।
कांग्रेस की रणनीतिक चूक के चलते कई वार्डों में बीजेपी उम्मीदवार निर्विरोध जीते, जिससे पार्टी का बोर्ड बनना तय हो गया।
जालोर, झालरापाटन, मनोहर थाना और अकलेरा में बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस ने बीजेपी के समीकरण बिगाड़ दिए हैं।
टोंक जिले की एकमात्र नगर परिषद टोंक में कांग्रेस ने बहुमत बनाया है।
भरतपुर नगर निगम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले में जनता ने निर्दलीयों पर भरोसा जताया है।
अजमेर नगर निगम में दोनों दलों की नजरें निर्दलीय पार्षदों पर टिकी हैं।
बारां और केकड़ी में नए दलों की एंट्री से चुनावी समीकरण बदले हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राजस्थान के किन जिलों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया?
- जालौर, झालरापाटन, मनोहर थाना, अकलेरा जैसे जिलों में कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
- आगामी पंचायत चुनावों के लिए बीजेपी के सामने क्या चुनौतियां हैं?
- सड़कों की खराब स्थिति और स्थानीय जनसमस्याओं की अनदेखी बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती बन रही है।
- भरतपुर और अजमेर नगर निगम में चुनाव परिणाम कैसे रहे?
- भरतपुर में निर्दलीयों ने 36 वार्ड जीते, जबकि अजमेर में कांग्रेस 37 और बीजेपी 32 सीटों पर सफल रही।
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