धौलपुर में निर्दलीय बने किंगमेकर, भाजपा को दहाई का आंकड़ा भी नहीं मिला
कांग्रेस ने तीन निकायों में बहुमत से बोर्ड बनाया, अन्य जगहों पर भाजपा-कांग्रेस निर्दलियों को लुभा रही
धौलपुर जिले के नगर निकाय चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर बन गए हैं। कांग्रेस ने तीन निकायों में बहुमत हासिल किया है जबकि भाजपा को महज 11 सीटें मिली हैं और दोनों पक्ष निर्दलीयों का समर्थन पाने की कोशिश कर रहे हैं। धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध प्रदर्शन को सरकार के प्रति नाराजगी से जोड़ा जा रहा है।
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धौलपुर। धौलपुर जिले के नगर निकाय चुनाव में किसी भी पार्टी को सभी निकायों में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर की भूमिका में आ गए हैं। कांग्रेस ने तीन निकायों में बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने का रास्ता साफ कर लिया है।
धौलपुर नगर परिषद की 60 सीटों में कांग्रेस ने 27 सीटें जीती हैं, भाजपा को 11 और निर्दलीय प्रत्याशियों को 22 सीटें मिलीं। बहुमत के लिए 31 सीटों की जरूरत है, लेकिन कोई भी दल यह आंकड़ा नहीं छू पाया है। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहे हैं।
राजाखेड़ा विधानसभा क्षेत्र की मनियां नगरपालिका में कांग्रेस ने 20 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत का आंकड़ा पार कर बोर्ड बनाने की स्थिति मजबूत कर ली है। वहीं राजाखेड़ा नगर पालिका की 35 सीटों में कांग्रेस ने 23 सीटें हासिल की हैं, भाजपा को दो और अन्य दलों को तीन सीटें मिली हैं। कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा बोर्ड गठन को लेकर सक्रिय हैं।
सरमथुरा में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया है, जबकि भाजपा 25 में से सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। यहां पिछले एक महीने से धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में धरना चल रहा है, जिसे चुनाव परिणामों में सरकार के प्रति नाराजगी से जोड़ा जा रहा है।
भाजपा के कई नेताओं ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। टिकट वितरण को भाजपा के कमजोर प्रदर्शन का मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछली बार की तरह इस बार भी क्रॉस वोटिंग की आशंका दोनों दलों की चिंता बढ़ा रही है।
पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए जोड़-तोड़ में लगे हैं, जबकि कांग्रेस भी बहुमत के लिए चार और भाजपा पांच अन्य पार्षदों के समर्थन की कोशिश कर रही है। सैंपऊ में भी बोर्ड गठन का फैसला निर्दलीय और अन्य प्रत्याशियों के रुख पर निर्भर करेगा।
28 जुलाई को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जिले में करीब 176.95 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया था, जिसमें 155.33 करोड़ रुपए के 14 कार्यों का लोकार्पण शामिल था। इसके बावजूद भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष और बसेड़ी विधायक संजय जाटव के गृह कस्बे सरमथुरा में कांग्रेस ने बहुमत हासिल किया है।
राजवीर सिंह राजावत ने कहा, "पूरे जिले में भाजपा को विधानसभा और लोकसभा में कोई सीट नहीं मिली है, इसके बावजूद पार्टी सभी नगर निकायों में अपना बोर्ड बनाएगी।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- निर्दलीय प्रत्याशियों का चुनाव में क्या असर रहा?
- निर्दलीय प्रत्याशी किंगमेकर बने और दोनों बड़ी पार्टियां उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।
- भाजपा के कमजोर प्रदर्शन के कारण क्या बताए गए हैं?
- टिकट न मिलने पर कई भाजपा नेताओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ा, जिससे पार्टी के वोट बंट गए।
- सरमथुरा में धरने का चुनाव परिणामों पर क्या प्रभाव माना गया?
- धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में धरना चल रहा है, जिसे सरकार के प्रति नाराजगी का संकेत माना जा रहा है।
- कांग्रेस बोर्ड गठन के लिए क्या कदम उठा रही है?
- कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा सक्रिय हैं और चार अन्य पार्षदों का समर्थन जुटाने की कोशिश जारी है।
- भाजपा के बोर्ड गठन के प्रयास कैसे चल रहे हैं?
- पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा भाजपा के लिए जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं और पाँच अन्य पार्षदों का समर्थन चाह रहे हैं।
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