हरतालिका तीज और श्रीकृष्ण की छठी की तिथियां और पूजा विधि
13-14 सितंबर हरतालिका तीज, 9 सितंबर श्रीकृष्ण की छठी का व्रत और पूजा
हरतालिका तीज इस साल 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जिसमें महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। श्रीकृष्ण की छठी का व्रत 9 सितंबर को है, इस दिन बाल गोपाल का श्रृंगार कर विशेष पूजा की जाती है, जिससे घर में सुख-शांति की कामना की जाती है।
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हरतालिका तीज इस वर्ष 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि श्रीकृष्ण की छठी का व्रत 9 सितंबर को है। दोनों पर्वों की पूजा विधि और महत्व को लेकर लोगों में उत्सुकता है। ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने हरतालिका तीज की सही तिथि और पूजा का विवरण दिया है।
हरतालिका तीज की तिथि और पूजा
हरतालिका तीज हिंदू धर्म का प्रमुख व्रत है, जिसे सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से करती हैं। इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, उदयातिथि के आधार पर व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा।
व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ कपड़े पहनकर संकल्प लें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की विधिवत पूजा करें। मान्यता है कि मिट्टी या रेत से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करना शुभ होता है। शिवजी को बेलपत्र, फूल और जल अर्पित करें, जबकि माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। पूजा के बाद हरतालिका तीज की कथा सुनें और आरती करें।
यह व्रत माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव के प्रति उनकी गहरी आस्था का प्रतीक है। पौराणिक कथा के अनुसार, पार्वती ने निर्जल व्रत रखकर कठोर तपस्या की, जिससे शिवजी प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।
श्रीकृष्ण की छठी का महत्व और पूजा
श्रीकृष्ण की छठी जन्माष्टमी के छह दिन बाद मनाई जाती है। इस दिन बाल गोपाल का विशेष श्रृंगार किया जाता है और सात्विक भोग लगाया जाता है। भक्त बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाते हैं, उनका श्रृंगार करते हैं और झूला झुलाते हैं।
इस पूजा का उद्देश्य नवजात शिशु की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना है। मान्यता है कि इस दिन लड्डू गोपाल की पूजा करने से घर में सुख-शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
छठी की पूजा शाम 4 बजे के बाद की जा सकती है, विशेष रूप से प्रदोष काल या गौधूलि बेला में। हालांकि, भक्त अपनी सुविधा अनुसार सुबह भी पूजा कर सकते हैं। पूजा के लिए अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, श्रद्धा और भक्ति से पूजा करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस अवसर पर कढ़ी-चावल का विशेष महत्व है, जिसे सात्विक तरीके से बनाकर बाल गोपाल को भोग लगाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हरतालिका तीज क्यों मनाई जाती है?
- यह व्रत सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए करती हैं।
- श्रीकृष्ण की छठी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- इस पूजा का उद्देश्य नवजात शिशु की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना है।
- क्या श्रीकृष्ण की छठी पूजा सुबह भी की जा सकती है?
- हाँ, भक्त अपनी सुविधा अनुसार सुबह भी पूजा कर सकते हैं।
- श्रीकृष्ण की छठी में कौन सा विशेष भोजन लगाया जाता है?
- कढ़ी-चावल को सात्विक तरीके से बनाकर भोग के रूप में लगाया जाता है।
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