सत्या निकेतन पीजी हादसे में चौथी गिरफ्तारी, लेबर कॉन्ट्रैक्टर पकड़ा
खतरनाक घोषित बिल्डिंग को नियंत्रित तरीके से तोड़ना शुरू, जांच सुप्रीम कोर्ट पहुंची
दिल्ली के सत्या निकेतन में पीजी की इमारत गिरने के मामले में लेबर कॉन्ट्रैक्टर को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया गया है, जिससे कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं। म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली ने हादसे वाली इमारत को नियंत्रित ढंग से तोड़ना शुरू कर दिया है और दिल्ली हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर देशभर की जर्जर और अवैध इमारतों की समीक्षा करने का संकेत दिया है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
दिल्ली के सत्या निकेतन में रविवार को गिरी पीजी की इमारत में कम से कम सात लोगों की मौत के बाद चौथी गिरफ्तारी हुई है। लेबर कॉन्ट्रैक्टर को उत्तर प्रदेश के कासगंज से पकड़ा गया है। इससे पहले पीजी के मालिक हरिराम, उनकी पत्नी और बेटे को गिरफ्तार किया जा चुका है।
म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) ने मंगलवार को सत्या निकेतन में हादसे वाली इमारत के पास खतरनाक घोषित बिल्डिंग को नियंत्रित तरीके से तोड़ना शुरू किया है। पड़ोसी इमारत को हादसे के बाद खाली करा लिया गया था।
पीजी मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया था। जस्टिस भव्य खराल ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, जबकि महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है। महेश ने पुलिस रिमांड में बताया कि पीजी संचालित करने वाली कंपनी की शिकायत पर बेसमेंट में पानी भरने और सीलन की समस्या दूर करने के लिए मरम्मत करवाई जा रही थी। पावर ट्रोवेल मशीन के उपयोग से भवन की संरचना कमजोर हुई और हादसा हुआ।
सत्या निकेतन पीजी हादसा मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने संकेत दिया कि वे इस मुद्दे को दिल्ली तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि देशभर में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों से अपने क्षेत्र की इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा है। जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी दिल्ली हाईकोर्ट में 10 दिन के भीतर दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल की जाएगी।
हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार और चार इंजीनियरिंग अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
सत्या निकेतन क्षेत्र 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसा था। 1970 के दशक में कॉलेजों के बढ़ने से यहां छात्र रहने लगे। अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार सहने के लिए नहीं बनी हैं। दिल्ली के लगभग 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पीजी हादसे के कारण क्या थे?
- पीजी में मरम्मत के दौरान पावर ट्रोवेल मशीन के उपयोग से भवन की संरचना कमजोर हुई।
- पीजी मालिकों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई हुई?
- हरिराम और उनकी पत्नी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत और बेटे महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।
- दिल्ली सरकार ने अन्य इमारतों की जांच कैसे शुरू की है?
- MCD ने सभी जोन के इंजीनियरों को 10 सितंबर तक रिपोर्ट देने को कहा है, जो दिल्ली हाईकोर्ट में दर्ज होगी।
- सुप्रीम कोर्ट ने हादसे को लेकर क्या कदम उठाए?
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली तक सीमित नहीं रखकर देशभर की जर्जर इमारतों की स्थिति की समीक्षा का इशारा किया।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद










Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.