दिल्ली के मंदिर में गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का विवाह होता है
वसुंधरा एन्क्लेव के श्री संकटहर गणपति मंदिर में सात दिन तक चलता है भव्य विवाह उत्सव
दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित श्री संकटहर गणपति मंदिर में गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश और देवी रिद्धि-सिद्धि का विवाह सात दिनों तक मनाया जाता है। इस समारोह में हवन-पूजन, संगीत, हल्दी और मेहंदी जैसी परंपरागत रस्में होती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस आयोजन से विवाह में आने वाली समस्याओं के दूर होने की मान्यता जुड़ी है।
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धर्म डेस्क। देशभर में गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित श्री संकटहर गणपति मंदिर में इस त्योहार पर भगवान गणेश का विवाह देवी रिद्धि-सिद्धि के साथ पूरे रीति-रिवाज से सात दिनों तक मनाया जाता है।
मंदिर की वास्तुकला में दक्षिण भारतीय द्रविड़ शैली की झलक मिलती है। वर्ष 2005 से यहां गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। विवाह समारोह केवल एक दिन का नहीं, बल्कि सात दिनों तक चलता है। इस दौरान हवन-पूजन, संगीत, हल्दी और मेहंदी जैसी पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं।
गणेश चतुर्थी के ठीक एक दिन पहले भगवान गणेश नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। मंदिर में विवाह के लिए फूलों और सजावटी सामग्री से सुंदर मंडप तैयार किया जाता है, जिसे देखकर लगता है कि किसी व्यक्ति का विवाह हो रहा हो।
विवाह के मुख्य दिन विशेष पूजा, भजन और महाहवन का आयोजन होता है। धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान गणेश और देवी रिद्धि-सिद्धि का विवाह संपन्न कराया जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस समारोह में शामिल होकर आशीर्वाद लेते हैं।
साउथ इंडिया सोसाइटी के प्रेसिडेंट सुनील चुड़ामड़ी के अनुसार, इस विवाह आयोजन से एक खास धार्मिक मान्यता जुड़ी है। वे कहते हैं कि जिन लोगों के विवाह में रुकावट आ रही है, वे इस भव्य समारोह के साक्षी बनकर बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। कई श्रद्धालु विवाह से जुड़ी परेशानियां लेकर मंदिर आते हैं और भगवान गणेश के सामने अपनी मनोकामना रखते हैं।
भक्तों की आस्था है कि गणपति बप्पा का आशीर्वाद उनके जीवन की बाधाओं को दूर करता है। सात दिनों तक चलने वाले इस आयोजन का समापन भी भव्य तरीके से किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश चतुर्थी के दौरान भगवान गणेश का विवाह क्यों मनाया जाता है?
- विवाह समारोह से विशेष धार्मिक मान्यता जुड़ी है जो विवाह में बाधाएं दूर करने में सहायक मानी जाती है।
- विवाह समारोह में कौन-कौन सी रस्में होती हैं?
- इसमें हवन-पूजन, संगीत, हल्दी, मेहंदी और नगर भ्रमण जैसी पारंपरिक रस्में होती हैं।
- मंदिर का विवाह मंडप कैसा होता है?
- मंडप फूलों और सजावटी सामग्री से इतना सुंदर होता है कि ऐसा लगता है जैसे किसी व्यक्ति का विवाह हो रहा हो।
- श्रद्धालु इस आयोजन में क्या करते हैं?
- श्रद्धालु इस भव्य समारोह में भाग लेकर आशीर्वाद लेते हैं और अपनी मनोकामनाएं भगवान गणेश के सामने रखते हैं।
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