लखनऊ में AI से बना कलश पंडाल, 10 दिन में 2 लाख श्रद्धालु होंगे शामिल
पेपर मिल कॉलोनी में 22 दिन में तैयार हुआ 45 फीट लंबा और चौड़ा पंडाल
लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 45 फीट लंबे कलश के आकार में गणेश चतुर्थी का पंडाल तैयार किया गया है। 14 से 23 सितंबर तक चलने वाले इस दस दिवसीय उत्सव में लगभग 2 लाख श्रद्धालु शामिल होने का अनुमान है। इस आयोजन का संचालन अक्षय समिति कर रही है।
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लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी में गणेश चतुर्थी के अवसर पर 45 फीट लंबे और चौड़े कलश के रूप में पंडाल सजाया गया है। इस पंडाल को तैयार करने में 22 दिन लगे और इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली गई। 14 से 23 सितंबर तक चलने वाले दस दिवसीय उत्सव में लगभग 2 लाख लोग शामिल होंगे।
अक्षय समिति नाम की संस्था इस पूरे उत्सव का आयोजन करती है। समिति के सदस्य आलोक आचार्य ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से लगातार यहां गणेश चतुर्थी का पंडाल सजाया जा रहा है। अरुण टंडन ने कहा, "यह हम लोगों का सौभाग्य है कि गणपति जी ने हमें अपनी पूजा करने के लिए चुना।"
रविवार देर रात निशातगंज स्थित पेपर मिल कॉलोनी में बप्पा विराजमान हुए। इस पंडाल को तैयार करने में कोलकाता से आए आठ कारीगरों ने दिन-रात मेहनत की। समिति ने बताया कि हम जैसा चाहते थे, पंडाल को ठीक वैसे ही कलश का रूप दिया गया है। हर साल प्रयास रहता है कि सनातन धर्म से जुड़े निशानी को पंडाल का रूप दिया जाए।
इस बार कलश का आकार समिति के विचार से आया, लेकिन डिजाइन बनाना चुनौतीपूर्ण था। फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कलश वाले पंडाल का डिजाइन तैयार किया गया। समिति ने कहा, "AI का सकारात्मक इस्तेमाल हमारे लिए बहुत मददगार रहा और इस पंडाल को बनाने में इसकी भूमिका अहम रही।"
पिछले साल शिवलिंग के आकार में पंडाल सजाया गया था, इस बार कलश का आकार दिया गया है। 14 सितंबर से 23 सितंबर तक 10 दिनों तक भव्य मेला लगेगा। हर दिन विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जिनमें कॉलोनी के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे।
समिति के अनुसार, दस दिनों में लगभग 2 लाख से अधिक लोगों का आगमन होता है। उत्सव की भव्यता और भीड़ को देखते हुए कहा जा सकता है कि बिना स्थानीय लोगों के सहयोग के यह संभव नहीं होता।
दिल्ली में भी गणेश उत्सव की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सोमवार को घरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना के साथ उत्सव शुरू होगा। राजधानी के कई इलाकों में पंडालों को अंतिम रूप दिया गया है।
कई सार्वजनिक पंडालों में भजन-कीर्तन, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। श्रद्धालु पूजा स्थल को फूलों और रोशनी से सजाएंगे। कई परिवार पर्यावरण अनुकूल प्रतिमा स्थापित करेंगे। शाम होते ही पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटेगी और ढोल-नगाड़ों के साथ गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजेंगे।
लक्ष्मी नगर, शाहदरा, कृष्णा नगर, गांधी नगर, प्रीत विहार, विवेक विहार, दिलशाद गार्डन और यमुना विहार समेत आसपास के इलाकों में विशेष तैयारियां की गई हैं। रविवार को बाजारों में पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, सजावटी सामान और प्रसाद की दुकानों पर चहल-पहल रही।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पंडाल तैयार करने में किन लोगों ने योगदान दिया?
- कोलकाता से आए आठ कारीगरों ने दिन-रात मेहनत से पंडाल बनाया।
- पिछले साल पंडाल का क्या आकार था?
- पिछले साल पंडाल का आकार शिवलिंग था, इस बार कलश है।
- लखनऊ में उत्सव के दौरान क्या-क्या कार्यक्रम होंगे?
- हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे जिनमें कॉलोनी के लोग भाग लेंगे।
- दिल्ली में गणेश उत्सव की क्या तैयारी है?
- दिल्ली में भी पंडाल तैयार हो चुके हैं और घरों में मूर्ति स्थापना होगी।
- स्थानीय लोगों की भूमिका उत्सव में कैसी है?
- स्थानीय लोगों के सहयोग के बिना उत्सव का आयोजन संभव नहीं होता।
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