14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ मनाई जाएंगी
इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी और दोपहर में गणपति स्थापना होगी
14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक साथ मनाई जाएंगी। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखेंगी और शाम को हरतालिका तीज का पूजन किया जाएगा, जबकि गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी को समापन होगा।
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धर्म डेस्क। इस साल 14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन मनाई जाएंगी। पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखेंगी।
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ अखंड सौभाग्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी और बालू से शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा की थी, जिससे शिवजी प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।
शास्त्रों के अनुसार, हरतालिका तीज व्रत को निर्जला रखने से शुभ फल प्राप्त होते हैं, लेकिन व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार व्रत भी रख सकता है। एक बार इस व्रत का संकल्प लेने के बाद इसे जीवनभर निभाना चाहिए। कुछ मान्यताओं के अनुसार, व्रत का उद्यापन 13 वर्ष पूरे करने के बाद विधि-विधान से किया जा सकता है। यदि कोई महिला शारीरिक रूप से असमर्थ हो तो परिवार की अन्य सुहागिन महिला इस परंपरा को आगे बढ़ा सकती है।
पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी और इसके बाद चतुर्थी तिथि शुरू होगी। गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा-अर्चना के लिए सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 1 बजकर 31 मिनट तक का शुभ मुहूर्त रहेगा। भक्त इसी अवधि में विधिपूर्वक गणपति की स्थापना कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। इस वर्ष 14 सितंबर को सुबह 9 बजकर 6 मिनट से रात 8 बजकर 4 मिनट तक चंद्र दर्शन वर्जित रहेगा। गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा और इसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा।
शाम को प्रदोष काल में हरतालिका तीज का पूजन किया जाएगा और महिलाएं रात्रि जागरण कर भजन-कीर्तन करेंगी। अगले दिन 15 सितंबर को हरतालिका व्रत का पारण और ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
हरतालिका तीज व्रत शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। यदि बाद में किसी कारणवश व्रत में बदलाव करना पड़े तो पारिवारिक परंपरा के अनुसार योग्य पंडित से सलाह लेना आवश्यक है।
यह जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है।
पंचांग और तिथियां
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। तृतीया तिथि सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 2 मिनट से दोपहर 2 बजे तक है, जिसमें अभिजीत और सिद्ध मुहूर्त भी शामिल हैं।
इस दिन चंद्र दर्शन सुबह 9 बजकर 6 मिनट से रात 8 बजकर 4 मिनट तक वर्जित रहेगा। गणेशोत्सव 10 दिनों तक चलेगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन इसका समापन होगा।
15 सितंबर को हरतालिका व्रत का पारण और ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
व्रत के नियम और मान्यताएं
हरतालिका तीज व्रत का संकल्प भगवान को साक्षी मानकर लिया जाता है, इसलिए इसे बीच में छोड़ना उचित नहीं माना जाता। हालांकि, यदि किसी कारणवश व्रत रखना संभव न हो तो इसका समापन विधि-विधान से किया जा सकता है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, व्रत का उद्यापन 13 वर्ष पूरे करने के बाद किया जा सकता है। यदि कोई महिला शारीरिक रूप से व्रत नहीं रख सकती तो परिवार की अन्य सुहागिन महिला इस परंपरा को आगे बढ़ा सकती है, जो परिवार की मान्यता पर निर्भर करता है।
व्रत शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है। जरूरत पड़ने पर पारिवारिक परंपरा के अनुसार योग्य पंडित से सलाह लेना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा का दर्शन क्यों वर्जित है?
- धार्मिक मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन शुभ नहीं माना जाता और इसलिए सुबह 9:06 से रात 8:04 तक चंद्र दर्शन वर्जित रहता है।
- क्या हरतालिका तीज का व्रत बीच में छोड़ा जा सकता है?
- व्रत का संकल्प भगवान को साक्षी मानकर लिया जाता है इसलिए बीच में छोड़ना उचित नहीं, पर आवश्यक होने पर विधि-विधान से समापन किया जा सकता है।
- हरतालिका तीज का व्रत कठिन होने पर क्या किया जा सकता है?
- शारीरिक रूप से असमर्थ महिला की जगह परिवार की अन्य सुहागिन महिला यह परंपरा निभा सकती है।
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