डूंगरपुर में गणेश चतुर्थी पर्व की धूम, प्रतिमाएं स्थापित
नगर व ग्रामीण इलाकों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान गणेश की स्थापना
डूंगरपुर में सोमवार को गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया गया, जिसमें नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना की गई। विभिन्न स्थानों पर शोभायात्राएं निकाली गईं और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान हुए, जहां भक्तों ने गणेशजी के दर्शन कर पूजा की।
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डूंगरपुर। डूंगरपुर जिले में सोमवार को गणेश चतुर्थी पर्व की धूम रही। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में भक्तिमय माहौल के बीच गणेश मंडलों ने शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की मनोहारी प्रतिमाओं की स्थापना की।
सदर बाजार, गांधी सर्किल, निम्बाहेड़ा रोड और नीमच मार्ग पर गणेश प्रतिमाओं की दुकानें सज गईं। शहर के गेपसागर की पाल पर ढोलक बजाते नंदी और कंधों पर सवार गणपति की स्थापना कर शाही अंदाज में आरती उतारी गई। कई पंडालों में भी गणपति विराजित कर दस दिवसीय गणेशोत्सव का आगाज हुआ।
गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों से शहर का माहौल भक्तिमय हो उठा। गणेश मंडलों ने प्रतिमाओं को गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में पंडालों तक लाया। शोभायात्राओं में युवा और श्रद्धालु भजनों की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। रातभर कई जगहों पर उत्साह के साथ भगवान गणेश की मूर्तियों को लाने का दौर चला।
गेपसागर की पाल पर ढोलक बजाते नंदी और कंधों पर सवार गणेशजी की मूर्ति को देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। यहां आतिशबाजी के बीच गणेशजी की स्थापना कर गंगा आरती की तर्ज पर गजानंद की आरती उतारी गई, जिसे देखने शहर के लोग उमड़ पड़े।
शहर की विभिन्न कॉलोनियों और मोहल्लों में अलग-अलग स्वरूपों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। कई लोगों ने घरों और प्रतिष्ठानों में भी गणेशजी की स्थापना कर प्रथम आराध्य देव की स्तुति की।
गणेश चतुर्थी पर शहर के प्रमुख मुरला गणेशजी और लाभ गणेशजी मंदिरों को चांदी की आंगी से सजाया गया। रोकड़िया गणेश मंदिर सहित अन्य मंदिरों में सुबह से ही विशेष अनुष्ठान शुरू हो गए। दर्शन के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। भक्तों ने भगवान गणेश के दर्शन कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेशोत्सव की शुरुआत कैसे हुई?
- कई पंडालों में गणपति विराजित कर दस दिवसीय उत्सव का आगाज हुआ।
- शोभायात्रा में लोग कैसे शामिल हुए?
- युवा और श्रद्धालु भजनों की धुन पर नाचते-गाते नजर आए।
- गेपसागर की पाल पर गणेश स्थापना का खास महत्व क्या था?
- यहां ढोलक बजाते नंदी और कंधों पर सवार गणेशजी की मूर्ति की स्थापना शाही अंदाज में हुई।
- मंदिरों में गणेश चतुर्थी पर क्या विशेष था?
- चांदी की आंगी से मूर्तियां सजाई गईं और सुबह से विशेष अनुष्ठान हुए।
- भक्तों ने गणेश चतुर्थी पर्व पर क्या कामनाएँ कीं?
- सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हुए भगवान गणेश के दर्शन किए।
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