दिल्ली कोर्ट ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर आरोप तय किए
IRCTC होटल टेंडर घोटाले में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्ज फ्रेम करने का आदेश
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों पर आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पटना में ट्रांसफर की गई जमीन को अपराध से हुई आय माना और कहा कि जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित नहीं थी। सात अन्य आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है।
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लालू। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को IRCTC होटल मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत नौ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पटना में ट्रांसफर की गई जमीन को अपराध से हुई आय माना है।
कोर्ट ने कहा कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रेलवे अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया था। इसके तहत रांची और पुरी के IRCTC होटलों के संचालन का ठेका एक निजी कंपनी को देने के बदले लालू यादव के परिवार को पटना में कीमती जमीन दी गई। अदालत ने यह जमीन अपराध से हुई आय यानी ‘Proceeds of Crime’ बताया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लालू प्रसाद यादव के खिलाफ हुई जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित नहीं थी। कोर्ट के मुताबिक, मामले में सामने आए तथ्यों के आधार पर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप तय करना उचित है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच लंबे समय से चल रही है। अदालत ने सात आरोपियों को आरोपों से मुक्त कर दिया है, जिनमें गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं।
अब अदालत के आदेश के बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया पूरी होगी और मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। अभियोजन पक्ष अपने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करेगा। इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में भी चर्चा तेज होने की संभावना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- लालू प्रसाद यादव पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप क्या है?
- उन पर रेलवे अधिकारियों के टेंडर हेरफेर के जरिए परिवार को जमीन मिलने का आरोप है।
- सात आरोपियों को आरोपों से किस आधार पर मुक्त किया गया?
- अदालत ने उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण उन्हें बरी किया।
- कोर्ट ने जांच पर कोई टिप्पणी की है?
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच राजनीतिक रूप से प्रभावित नहीं थी।
- अगली कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?
- अदालत के आदेश के बाद अभियोजन पक्ष सबूत पेश कर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा।
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