पटना में गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर पहुंचा, फिर घटा
बिहार में बाढ़ का स्वरूप असामान्य रहा, राहत कार्य जारी हैं
पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर इस वर्ष 50.58 मीटर तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष से अधिक है, लेकिन अब घटकर लगभग 50.40 मीटर पर आ गया है। बिहार में बाढ़ की स्थिति अलग रही, हालांकि जल संसाधन विभाग और प्रशासन की निगरानी से बाढ़ का बड़ा संकट टला है। राहत कार्य जारी हैं और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी रखने की सूचना दी गई है।
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लक्सर। पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर इस बार 50.58 मीटर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के उच्चतम स्तर 50.52 मीटर से अधिक है। उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि फिलहाल जलस्तर घटकर करीब 50.40 मीटर पर आ गया है और बाढ़ का संकट टलने की उम्मीद है।
बिहार में इस वर्ष बाढ़ का स्वरूप सामान्य वर्षों से अलग रहा। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि गंगा नदी ने कई स्थानों पर पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। पटना शहर सुरक्षित रहा क्योंकि जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन ने मुस्तैदी से काम किया।
गंगा के दूसरी ओर दियारा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी फैला, जहां राहत एवं सहायता कार्य जारी हैं। पुनपुन और दरधा नदियों ने भी इस बार गंभीर चुनौती पेश की हैं, जो झारखंड क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण अपने उच्चतम जलस्तर तक पहुंच गई हैं।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने रिसाव और कटाव को तत्काल नियंत्रित किया। किसी प्रमुख तटबंध में बड़ा ब्रीच नहीं हुआ है। भागलपुर के खरीक प्रखंड में गंगा की धारा बदलने जैसी स्थिति बनी थी, लेकिन लगातार निगरानी से तटबंध सुरक्षित रखा गया। इससे नवगछिया क्षेत्र के रिहाइशी इलाकों को बड़े नुकसान से बचाया गया।
गंगा का जलस्तर 50.58 मीटर के उच्चतम स्तर के बाद घटकर करीब 50.40 मीटर पर पहुंच गया है। इलाहाबाद और वाराणसी की ओर भी जलस्तर में गिरावट का रुझान है। जलस्तर घटने से पुनपुन और दरधा नदियों की जल निकासी बेहतर होगी। कोसी, गंडक और बागमती नदियों में जलस्तर नियंत्रित रहने से स्थिति संभालने में मदद मिली। यदि इन नदियों में भारी उफान आता तो हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते थे।
राहत शिविरों में भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, पशुओं के लिए अलग व्यवस्था और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। किसानों की फसल क्षति समेत अन्य आवश्यक सहायता देने की प्रक्रिया भी जारी है।
बारिश रुकने और पहाड़ी क्षेत्रों से पानी का दबाव कम होने के कारण गंगा नदी का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे आ रहा है। इससे प्रशासन और ग्रामीणों को राहत मिली है, हालांकि खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, "इस बार बाढ़ का स्वरूप सामान्य वर्षों से अलग रहा और गंगा में पहले गंभीर उफान देखने को मिला। फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि गंगाजी का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकार की ओर से राहत कार्य जारी हैं।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गंगा नदी के जलस्तर में गिरावट क्यों आई?
- बारिश के रुकने और पहाड़ी इलाकों से पानी के दबाव कम होने की वजह से जलस्तर घटा है।
- पटना शहर में बाढ़ का संकट कैसे टला?
- जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन की मुस्तैदी से जगह को सुरक्षित रखा गया।
- दियारा क्षेत्र में क्या परिस्थितियां हैं?
- दियारा क्षेत्र के निचले इलाकों में पानी फैला हुआ है और राहत व सहायता कार्य जारी हैं।
- किसान और पशुपालक कैसे प्रभावित हुए हैं?
- राहत शिविरों में किसानों को फसल क्षति के लिए आवश्यक सहायता और पशुओं के लिए चारा व स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
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