CTI ने 2000 रुपये से अधिक UPI पेमेंट पर शुल्क लगाने का विरोध किया
व्यापारियों का कहना है कि MDR से ग्राहक और व्यापारी दोनों प्रभावित होंगे
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 2000 रुपये से अधिक की UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने का विरोध किया है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि डिजिटल भुगतान पर कोई MDR शुल्क न लगाया जाए और बैंकों को सीधे इंसेंटिव दिया जाए। CTI का कहना है कि MDR शुल्क से व्यापारियों और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और नकद भुगतान बढ़ सकता है।
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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 2000 रुपये से अधिक की UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का विरोध किया है। संगठन ने कहा कि इससे व्यापारियों और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और लोग नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।
CTI ने मांग की है कि UPI और रूपे डेबिट कार्ड पर कोई MDR शुल्क न लगाया जाए। संगठन का कहना है कि भले ही MDR दुकानदार से लिया जाए, लेकिन इसका असर अंततः ग्राहक पर ही पड़ेगा।
CTI ने सरकार से अपील की है कि अगर बैंकों को डिजिटल भुगतान के संचालन में खर्च की समस्या है तो उन्हें सीधे इंसेंटिव दिया जाए, न कि व्यापारी या ग्राहक पर बोझ डाला जाए।
व्यापारियों का मानना है कि MDR शुल्क लागू होने से डिजिटल भुगतान की जगह फिर से नकद भुगतान बढ़ सकता है, जो आर्थिक रूप से नुकसानदेह होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- MDR शुल्क लगाने से व्यापारियों को क्या नुकसान होगा?
- MDR शुल्क लगाने से व्यापारियों को लागत बढ़ेगी और वे इसका असर ग्राहकों पर डाल सकते हैं।
- सरकार से CTI की क्या विशेष अपील है?
- CTI ने कहा है कि डिजिटल भुगतान में बैंकों के खर्च का समाधान सीधे इंसेंटिव देकर किया जाए।
- MDR शुल्क लगने से उपभोक्ताओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और वे नकद भुगतान की ओर लौट सकते हैं।
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