प्रतापगढ़ में जैन समाज ने मनाया पर्युषण पर्व का पहला दिन
दलोट में आठ दिन तक चलेगा आत्मशुद्धि और क्षमा का यह पवित्र पर्व
प्रतापगढ़ के दलोट में जैन समाज ने पर्युषण पर्व का पहला दिन मनाया, जो आठ से पंद्रह सितंबर तक चलता है। इस दौरान जैन मंदिरों में पूजा, भजन और प्रवचन होते हैं, और लोग तप, त्याग तथा आत्मशुद्धि का पालन करते हैं। पर्व के पहले दिन जैन व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर धर्म आराधना में हिस्सा लिया।
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प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ के दलोट में जैन समाज ने पर्युषण पर्व की शुरुआत की। यह पर्व आठ सितंबर से पंद्रह सितंबर तक आठ दिनों तक चलेगा और आत्मशुद्धि, क्षमा तथा त्याग का संदेश देता है।
पर्युषण जैन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व है। इस दौरान भगवान महावीर स्वामी और शीतलनाथ भगवान की विशेष पूजा की जाती है। सकल जैन समाज के महिला, पुरुष और युवा भगवान का अभिषेक कर श्रद्धा प्रकट करते हैं।
पर्युषण के आठ दिनों में मंदिरों में रोज पूजा, भजन और प्रवचन होते हैं। जैन समाज के लोग तप, त्याग और साधना में लगे रहते हैं। इस पर्व के पहले दिन दलोट के सभी जैन व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और व्यापार छोड़कर धर्म आराधना में समय दिया।
समाजजनों का कहना है कि धर्म और आत्म-कल्याण व्यापार से बढ़कर है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। अंत में सभी ने विश्व शांति, प्रेम और क्षमाभाव के लिए प्रार्थना की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पर्युषण पर्व का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- पर्युषण आत्मशुद्धि, क्षमा और त्याग का संदेश देता है और जैन धर्म का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है।
- पर्युषण के दौरान जैन समाज के लोग क्या करते हैं?
- वे तपस्या, त्याग और साधना में लगे रहते हैं और मंदिरों में पूजा, भजन तथा प्रवचन आयोजित होते हैं।
- पर्युषण के पहले दिन दलोट के जैन व्यापारियों ने क्या किया?
- उन्होंने अपनी दुकानें बंद रखकर धर्म आराधना में समय दिया।
- पर्युषण पर्व के दौरान जनता की क्या भावनाएं प्रकट होती हैं?
- श्रद्धालु विश्व शांति, प्रेम और क्षमा भाव के लिए प्रार्थना करते हैं।
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