राजसमंद नगर परिषद में भाजपा ने 27 सीटों पर कब्जा जमाया
कांग्रेस 14 सीटों पर सिमटी, निर्दलीयों ने चार सीटें जीतीं, सियासी समीकरण बदले
राजसमंद नगर परिषद के 45 वार्डों में भाजपा ने 27 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि कांग्रेस को 14 सीटें मिली हैं। जिले के पांच नगर निकायों में कांग्रेस ने कुल 74 वार्डों और भाजपा ने 70 वार्डों पर विजय प्राप्त की है, जिसमें निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भीम नगरपालिका में कांग्रेस ने प्राथमिकता हासिल की है, जबकि भरतपुर की रूपवास नगर पालिका में निर्दलीय प्रत्याशियों का बोलबाला रहा।
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राजसमंद। राजसमंद नगर परिषद के 45 वार्डों में भाजपा ने 27 सीटों पर जीत हासिल की है। कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं जबकि चार सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे। इस चुनाव में भाजपा ने पिछली बार की तुलना में अपनी स्थिति मजबूत की है।
राजसमंद जिले के पांच नगर निकायों के 155 वार्डों में कांग्रेस ने 74 वार्डों पर जीत दर्ज की है, जबकि भाजपा को 70 वार्डों में सफलता मिली। 11 वार्डों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों के बीच अपनी ताकत दिखाई है। जिले की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला बेहद करीबी रहा है, और निर्दलीय पार्षद आगामी सियासी समीकरणों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
राजसमंद नगर परिषद में भाजपा ने 27 वार्डों पर कब्जा जमाया है, जो पिछली बार के 17 से बढ़कर हुआ है। कांग्रेस की सीटें 26 से घटकर 14 रह गई हैं। कांग्रेस को सीधे तौर पर 12 वार्डों का नुकसान हुआ है, जिसका कारण नेताओं द्वारा वार्डवार पर्याप्त रुचि न दिखाना बताया जा रहा है। भाजपा ने डोर-टू-डोर संपर्क से मतदाताओं को साधने की कोशिश की।
भीम नगरपालिका में पहली बार हुए चुनाव में कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा का एक प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुआ, जबकि बैलेट से पार्टी को केवल एक सीट मिली। कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बेहतर तालमेल दिखाया, जबकि भाजपा के नुकसान के पीछे विधायक हरिसिंह रावत के विवादित बयान को कारण माना जा रहा है।
भरतपुर की रूपवास नगर पालिका में निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहा है। 25 वार्डों में से 14 सीटों पर निर्दलीय विजयी हुए हैं। कांग्रेस को दो और भाजपा को नौ सीटें मिलीं। इस बार बोर्ड गठन में निर्दलीयों की अहम भूमिका रहेगी।
नाथद्वारा नगर पालिका में भाजपा को 20 और कांग्रेस को 19 सीटें मिली हैं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय विजयी रहे हैं। राजसमंद और आमेट में भाजपा का दबदबा है, जबकि भीम और देवगढ़ में कांग्रेस की मजबूत पकड़ बनी हुई है। नाथद्वारा में कांटे की टक्कर ने जिले की राजनीति को कई रंगों में बांट दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाजपा ने राजसमंद नगर परिषद में अपनी स्थिति कैसे मजबूत की?
- भाजपा ने डोर-टू-डोर संपर्क से मतदाताओं को साधने की कोशिश की, जिससे पिछली बार की तुलना में सीटें बढ़ीं।
- कांग्रेस को राजसमंद नगर परिषद में सीटें क्यों मिलीं कम?
- कांग्रेस नेताओं द्वारा वार्डवार पर्याप्त रुचि न दिखाना सीटों के नुकसान का मुख्य कारण माना गया।
- भीम नगरपालिका में भाजपा के चुनाव परिणाम कैसे रहे?
- भीम नगरपालिका में भाजपा का एक प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुआ, लेकिन बैलेट से केवल एक सीट मिली।
- भरतपुर की रूपवास नगर पालिका में किसका दबदबा रहा?
- निर्दलीय प्रत्याशियों का दबदबा रहा, जिन्होंने 14 सीटें जीतकर बोर्ड गठन में अहम भूमिका निभाई।
- नाथद्वारा नगर पालिका में सीटों का बंटवारा कैसा रहा?
- भाजपा को 20 और कांग्रेस को 19 सीटें मिलीं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय जीत हासिल की।
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