बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में 301 अभ्यर्थी क्रमवार पास, जांच जारी
परीक्षा परिणाम में 79 स्थानों पर संदिग्ध क्रमवार सफलता, आयोग से जवाब मांगा गया
बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में 79 स्थानों पर 301 अभ्यर्थी जारी पैटर्न के आधार पर क्रमवार पास पाए गए हैं, जिसे संदिग्ध माना जा रहा है। जांच एजेंसी ईओयू ने आयोग से जवाब मांगा है, लेकिन अभी तक संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने तथा सॉल्वर सिंडिकेट की गिरफ्तारी के बावजूद आयोग ने रिजल्ट जारी रखा है।
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बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा 1799 पदों पर आयोजित दारोगा मुख्य परीक्षा के परिणाम में 79 स्थानों पर 301 अभ्यर्थी क्रमवार पास पाए गए। ईओयू ने इस संदिग्ध पैटर्न को लेकर आयोग से जवाब मांगा है, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला है।
परीक्षा परिणाम की 68 पेज की रिजल्ट शीट में 79 स्थानों पर लगातार अभ्यर्थियों के पास होने की कतारें मिली हैं। कुल 34,298 अभ्यर्थियों में से 10,759 को शारीरिक दक्षता परीक्षा के लिए चुना गया।
गया के रामपुर थाने में परीक्षा के दिन ही एक संगठित सॉल्वर सिंडिकेट की प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें ब्लूटूथ और वॉकी-टॉकी के जरिए जुड़े कई अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आई। इसके बावजूद आयोग ने इन संदिग्ध रोल नंबरों को परिणाम में शामिल किया।
छात्रों ने मुख्य सचिव और ईओयू को ज्ञापन देकर 'हॉल मैनेजमेंट' और मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने आरटीआई के तहत अपनी ओएमआर शीट और उत्तर-कुंजी मांगी, लेकिन आयोग ने प्रक्रिया में होने का हवाला देते हुए जवाब नहीं दिया। यह उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है, जिसमें अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट और मॉडल उत्तर-कुंजी देखने का अधिकार दिया गया था।
परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों के पास वायरल तस्वीरें हैं, जिनमें परीक्षा केंद्र के अंदर और बाहर की तस्वीरें शामिल हैं। इनमें एक छात्र की अंगूठी पहने ओएमआर शीट के साथ फोटो भी है, जबकि उस छात्र का नाम सफल अभ्यर्थियों की सूची में भी है।
गया कॉलेज के पास रामपुर शिव मंदिर से सॉल्वर आशुतोष कुमार को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसके पास वॉकी-टॉकी, लैपटॉप और ईयरफोन मिले थे। जांच में पता चला कि वह व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रश्न हल करवा रहा था। इस गिरोह की गिरफ्तारी के बाद भी आयोग ने उस केंद्र का रिजल्ट जारी रखा।
59 परीक्षा केंद्रों में से गया कॉलेज सेंटर से 471 अभ्यर्थी पास हुए, जो सबसे अधिक है। पूर्णिया के राजकीय कन्या उच्च विद्यालय भी विवादों में है। 27 मई को दो केंद्रों पर वॉकी-टॉकी और प्रश्नपत्र वायरल करने की प्राथमिकी दर्ज हुई थी, लेकिन उन केंद्रों से 584 अभ्यर्थियों का चयन हुआ।
ईओयू ने शीर्ष 20 परीक्षा केंद्रों की सूची और उन केंद्रों से क्रमवार सफल अभ्यर्थियों का विवरण आयोग से मांगा है। आयोग ने अभी तक ईओयू को जवाब नहीं दिया है, जबकि रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। आयोग का कहना है कि जवाब तैयार किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ईओयू ने आयोग से क्या मांगा है?
- ईओयू ने संदिग्ध पैटर्न को लेकर शीर्ष 20 परीक्षा केंद्रों की सूची और सफल अभ्यर्थियों का विवरण मांगा है।
- परीक्षा केंद्रों में संदिग्धता के क्या आधार हैं?
- परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ, वॉकी-टॉकी और सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होना संदिग्धता के मुख्य कारण हैं।
- छात्रों ने मुख्य सचिव और ईओयू को क्या शिकायतें की हैं?
- छात्रों ने हॉल मैनेजमेंट और मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है और अपने ओएमआर शीट और उत्तर-कुंजी मांगी है।
- सॉल्वर सिंडिकेट से जुड़ी जांच में क्या खुलासा हुआ?
- एक गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए प्रश्न हल करवा रहा था, जिस पर गिरोह के प्रमुख आशुतोष कुमार को गिरफ्तार किया गया।
- आयोग ने संदिग्ध अभ्यर्थियों को परिणाम में क्यों शामिल किया?
- आयोग ने जांच के बावजूद संदिग्ध रोल नंबरों को परिणाम में रखा है और अभी तक ईओयू को संतोषजनक जवाब नहीं दिया है।
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