ठठिया के आलू किसानों ने 18 सितंबर को कलेक्ट्रेट प्रदर्शन का आह्वान किया
किसानों ने बाजार व्यवस्था और कीमतों को लेकर पंचायत में अपनी मांगें रखीं
ठठिया के आलू किसानों ने 18 सितंबर को कन्नौज कलेक्ट्रेट में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। उन्होंने बाजार व्यवस्था सुधार, उचित दाम, मंडी टैक्स समाप्ति, न्यूनतम समर्थन मूल्य और फसल क्षतिपूर्ति जैसे कई मांगें रखीं। साथ ही, क्षेत्र में बारिश से फसल खराब होने पर मुआवजे की भी मांग की गई है।
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ठठिया। ठठिया के आलू किसानों ने रविवार को बेहटा गांव में किसान पंचायत कर अपनी बदहाल बाजार व्यवस्था और उचित दाम की मांग को लेकर विरोध जताया। किसान नेता अजय अनमोल ने 18 सितंबर को कन्नौज कलेक्ट्रेट में प्रस्तावित किसान आंदोलन में बड़ी संख्या में पहुंचने का आह्वान किया।
पंचायत में किसानों ने मांग की कि शीतगृहों में भंडारित आलू का पूरा भंडारण शुल्क सरकार वहन करे। उन्होंने उत्तर प्रदेश में आलू पर मंडी टैक्स समाप्त करने, हाईब्रिड आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1000 रुपये और चिप्स व हॉलैंड क्वालिटी आलू का 1500 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की भी मांग की।
किसानों ने भाव-अंतर योजना लागू करने, रेल से आलू भेजने पर भाड़ा माफ करने, निर्यात बढ़ाने, निर्यात परिवहन छूट 50 प्रतिशत करने, किसानों का कर्ज माफ करने तथा राशन दुकानों और गोशालाओं में आलू के उपयोग की भी मांग रखी।
अजय अनमोल ने किसानों के साथ आलू मार्च निकाला और सिर पर आलू का पैकेट रखकर बाजार में चल रही मंदी और किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, "आलू किसानों को लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिलने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।" पंचायत में जिलाध्यक्ष राजीव कटियार, सर्वेश, संतोष, सुनील और विजय कटियार सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
क्षेत्र में बारिश से किसानों की स्थिति और बिगड़ी है। सेमरा वीरभानपुर, जोगीपुर समेत कई गांवों में हजारों एकड़ धान की फसल पानी में डूबकर खराब हो गई है। प्रभावित किसानों ने शासन-प्रशासन से फसलों की क्षतिपूर्ति के लिए मुआवजे की मांग की है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- किसान पंचायत में कौन-कौन प्रमुख कृषि नेता मौजूद थे?
- पंचायत में जिलाध्यक्ष राजीव कटियार, सर्वेश, संतोष, सुनील और विजय कटियार सहित अन्य किसान मौजूद थे।
- किसान बाजार मंदी पर कैसे अपनी बात रख रहे हैं?
- अजय अनमोल ने सिर पर आलू का पैकेट रखकर आलू किसानों की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया।
- किसान किस तरह की सरकारी मदद की मांग कर रहे हैं?
- किसान कर्ज माफी, निर्यात परिवहन छूट, भंडारण शुल्क माफी और फसल क्षतिपूर्ति के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
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