सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट को छात्र को नोटिस जारी करने पर फटकार लगाई
छात्र को 5 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड का नोटिस जारी करने पर मुख्य न्यायाधीश ने कार्रवाई की मांग की
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट को 5 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड का नोटिस जारी करने पर फटकार लगाई और कहा कि 1 सितंबर के आदेश के बाद छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने जिलाधिकारी से जवाब मांगा और बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा एक छात्र को 5 लाख रुपये के पर्सनल बॉन्ड का नोटिस जारी करने पर कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि 1 सितंबर के आदेश के बाद छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले में जिलाधिकारी से जवाब मांगा है।
नोटिस जारी करने का विवाद
ग्रेटर नोएडा के एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के दूसरे वर्ष के एक छात्र को शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया था। पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि छात्र सरकार-विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहे थे और उन्हें प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। नोटिस में कहा गया कि छात्र ने अन्य छात्रों को उकसाया था।
इस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई और मजिस्ट्रेट की हिम्मत पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि 1 सितंबर को दिए गए आदेश के अनुसार छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने नोटिस को रिकॉर्ड पर लाने और संबंधित अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और नोटिस वापस लेने की जानकारी
छात्र के वकील ने बताया कि 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक छात्र का मामला नहीं है।
हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोएडा के जिलाधिकारी से जवाब मांगा है और कार्रवाई पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता। कोर्ट ने इस मामले को गंभीर बताया और कहा कि छात्रों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई पूरे देश पर असर डाल सकती है।
प्रेस रिपोर्ट के अनुसार, बाद में यह नोटिस वापस ले लिया गया।
वकील
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भाषा बिल्कुल स्पष्ट है।
सीजेआई सूर्यकांत, मुख्य न्यायाधीश
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस वापस लेने के बाद क्या कार्रवाई की है?
- सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के जिलाधिकारी से इस मामले में जवाब मांगा है और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
- यह नोटिस क्यों जारी किया गया था?
- नोटिस इसलिए जारी किया गया था क्योंकि पुलिस रिपोर्ट में कहा गया था कि छात्र सरकार-विरोधी और भ्रामक बातें फैला रहे थे और अन्य छात्रों को उकसाने का आरोप था।
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