केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में छह राज्यों ने किशाऊ बांध समझौता किया
15,000 करोड़ की लागत वाली बहुउद्देशीय परियोजना से हरियाणा सहित छह राज्यों को मिलेगा पानी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में छह राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर जल वितरण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह परियोजना टोंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है, जिससे हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली सहित सभी राज्यों को जल सुरक्षा मिलेगी। समझौते के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रीमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और काम तेजी से शुरू होगा।
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नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छह राज्यों ने किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर ऐतिहासिक जल वितरण समझौते पर हस्ताक्षर किए। करीब छह दशक से लंबित इस विवाद के समाधान से परियोजना का काम तेजी से शुरू होगा और हरियाणा सहित सभी राज्यों को जल सुरक्षा मिलेगी।
परियोजना और समझौते का विवरण
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टोंस नदी पर प्रस्तावित है। इस परियोजना की अनुमानित लागत अब करीब 15,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में दोगुनी है। परियोजना की जल भंडारण क्षमता 1,324 मिलियन घन मीटर होगी और इसमें 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम बनाया जाएगा। इससे करीब 0.97 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी और सालाना लगभग 1,476 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन की संभावना है।
इस समझौते के तहत हरियाणा को 836 क्यूसेक, उत्तर प्रदेश को 543.2 क्यूसेक, राजस्थान को 163.52 क्यूसेक और दिल्ली को 105.28 क्यूसेक पानी मिलेगा। छह राज्यों के बीच यह समझौता जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राजनीतिक और प्रशासनिक पहल
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस समझौते को प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा, "किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना पर छह राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ है।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का मार्गदर्शन वर्षों से लंबित किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने में सराहनीय रहा है।
सैनी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, "यह दुखदायी है कि भाजपा का विरोध करते-करते विपक्षी नेता देश का विरोध करने लगे हैं।" उन्होंने हरियाणा सरकार की प्रतिबद्धता जताई कि प्रदेश के हर खेत और घर तक पानी पहुंचाने के लिए काम जारी रहेगा।
बैठक और आगे की प्रक्रिया
समझौते पर हस्ताक्षर नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में सुबह 11:30 बजे हुए। बैठक में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और छह राज्यों के मुख्य सचिव भी मौजूद थे। इससे पहले 16 जून को हुई बैठक में सभी राज्यों के बीच सहमति बन चुकी थी।
अब समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद किशाऊ परियोजना पर काम तेजी से शुरू होगा। इस परियोजना के पूरा होने से हरियाणा के पानी का कुल शेयर लगभग 1143 मिलियन क्यूबिक मीटर हो जाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सक्रियता और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के समन्वय से यह ऐतिहासिक समझौता संभव हुआ है। यह परियोजना उत्तर भारत के जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और राज्यों के बीच सहयोग की नई राह खोल सकती है।
संवाद, सहयोग और आपसी सहमति के माध्यम से वर्षों पुराने इस विषय को सुलझाया गया है, जिससे न केवल प्रदेश की वर्तमान जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी जल सुरक्षा सुनिश्चित होगी
अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
यमुना नदी के जल में हरियाणा का वैध हिस्सा 48 प्रतिशत है, इसलिए जब भी ऊपरी क्षेत्रों में जल भंडारण क्षमता या पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, उसका सबसे बड़ा फायदा हरियाणा प्रदेश को मिलेगा
नायब सिंह सैनी, हरियाणा के मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इस परियोजना का काम अब कब शुरू होगा?
- समझौते पर हस्ताक्षर के बाद परियोजना केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजी जाएगी, जिसके बाद काम तेजी से शुरू होगा।
- परियोजना के जल वितरण समझौते में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
- इस समझौते में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली समेत कुल छह राज्यों ने भाग लिया है।
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