जस्टिस अश्वनी मिश्रा बने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समारोह में मौजूद रहे, पंजाब के मुख्यमंत्री अनुपस्थित
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है और उन्होंने शपथ ग्रहण की है। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद हुई, हालांकि पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति जताई थी। जस्टिस मिश्रा ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कई न्यायिक और पर्यावरण से जुड़े मामलों में काम किया है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को पूर्णकालिक मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। समारोह में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद थे, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अनुपस्थित रहे।
जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पद की शपथ दिलाई। उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के करीब एक महीने बाद हुई है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 6 अगस्त को उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी।
पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार किए बिना केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति की, जिससे विवाद भी पैदा हुआ था। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मुख्य न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहने की परंपरा रही है। इस बार हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी समारोह में उपस्थित थे, जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं आए।
शपथ ग्रहण समारोह में हाईकोर्ट के मौजूदा और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, उनके परिजनों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। मंच का संचालन पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा ने किया। पंजाब सरकार ने चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पहले ही आपत्ति दर्ज कराई थी और कैबिनेट में प्रस्ताव पारित किया था कि स्थिति स्पष्ट होने तक शपथ ग्रहण समारोह नहीं होना चाहिए।
जस्टिस मिश्रा इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे हैं। उनका तबादला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ, जहां उन्होंने 21 जुलाई 2025 को न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 1 जून 2026 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू के सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत होने के बाद उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल में न्यायिक ढांचे, न्याय तक पहुंच और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। इस दौरान गुरुग्राम में टावर ऑफ जस्टिस और चंडीगढ़ के सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में बहुस्तरीय पार्किंग सुविधा का उद्घाटन हुआ। उन्होंने न्यायिक भवनों को मजबूत करने के लिए एक समिति का गठन भी किया, जो न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण और न्याय तक पहुंच बेहतर करने के उपाय सुझा रही है।
पर्यावरण और पुनर्वास से जुड़े मामलों में भी कई पहल हुईं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में क्षेत्रव्यापी पौधरोपण अभियान शुरू किया, जिसमें जस्टिस मिश्रा भी शामिल थे। मानसून के दौरान इस अभियान के तहत अदालत परिसरों और अन्य न्यायिक संस्थानों में देशज प्रजातियों के लाखों पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा नशे की समस्या से जूझ रहे युवाओं के पुनर्वास और उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद के लिए युवा रिकवरी एवं पुनर्वास अभियान भी शुरू किया गया। जस्टिस मिश्रा की पीठ ने अवैध खनन, पर्यावरण संरक्षण, न्यायिक प्रशासन, सेवा कानून और संवैधानिक मुद्दों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई की है। उन्होंने जनहित याचिकाओं की सुनवाई पर भी जोर दिया और उपयुक्त मामलों में राज्य सरकार से जवाब मांगा।
अरावली क्षेत्र में कथित अवैध खनन से जुड़े कई संवेदनशील पर्यावरणीय मामलों की भी उनकी पीठ ने सुनवाई की। जस्टिस मिश्रा का जन्म 16 नवंबर 1968 को हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स और कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की। 8 मई 1993 को उन्होंने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।
उन्होंने मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक और सेवा मामलों में वकालत की। वकालत के दौरान उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, इफको, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन सहित कई वैधानिक एवं सार्वजनिक निकायों की ओर से पैरवी की। वह महत्वपूर्ण मामलों में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता भी रहे और 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित हुए।
3 फरवरी 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 1 फरवरी 2016 को स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। वह 20 जुलाई 2025 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में रहे। उनके कार्यकाल के दौरान अक्टूबर 2023 में निठारी हत्याकांड मामलों में उनके पीठ ने महत्वपूर्ण फैसला दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जस्टिस अश्वनी मिश्रा की न्यायिक प्राथमिकताएं क्या रही हैं?
- उनके कार्यकाल में न्यायिक ढांचे को मजबूत करने, न्याय तक पहुंच बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया।
- जस्टिस मिश्रा ने युवा पुनर्वास के लिए क्या पहल की है?
- उन्होंने नशे की समस्या से जूझ रहे युवाओं के लिए युवा रिकवरी एवं पुनर्वास अभियान शुरू किया।
- जस्टिस मिश्रा की शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि क्या है?
- उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स और एलएलबी की डिग्री प्राप्त की हैं तथा वकालत में संवैधानिक व दीवानी मामलों पर काम किया।
- उनकी नियुक्ति पर पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया क्या थी?
- पंजाब सरकार ने नियुक्ति पर आपत्ति जताई और कैबिनेट में शपथ ग्रहण समारोह स्थगित करने का प्रस्ताव पारित किया था।
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