बीमा कंपनी ने बाढ़ में फसल का दावा रोका, किसान को 1.48 लाख रुपये मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी मानते हुए बीमा कंपनी को किसान को भुगतान का आदेश दिया
झारखंड के पुनाढ़ी गांव के किसान राजेंद्र शर्मा की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बाढ़ में नष्ट हुई फसल का बीमा दावा बीमा कंपनी ने क्राप कटिंग डाटा न होने के कारण रोका। जिला उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को 1.48 लाख रुपये मुआवजा, ब्याज और अन्य खर्च देने का आदेश दिया तथा बीमा कंपनी को अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया।
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पुनपुन थाना क्षेत्र के पुनाढ़ी गांव के किसान राजेंद्र शर्मा की बाढ़ में पूरी फसल नष्ट हो गई थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने के बाद भी कंपनी ने क्राप कटिंग डाटा न होने का हवाला देकर क्लेम रोक दिया। उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को 1.48 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
किसान राजेंद्र शर्मा ने खरीफ 2016 में धान की फसल का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया था। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड से 887.88 रुपये प्रीमियम जमा किया था। बाढ़ में पुनाढ़ी और सबलपुर पंचायत की पूरी फसल नष्ट हो गई। जिला कृषि पदाधिकारी समेत संबंधित विभागों की रिपोर्ट में भी फसल बर्बाद होने की पुष्टि हुई। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने यह कहते हुए भुगतान करने से मना कर दिया कि क्षेत्र का वैध क्राप कटिंग डाटा उपलब्ध नहीं है।
राजेंद्र शर्मा ने 19 नवंबर 2018 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई और 4.79 लाख रुपये फसल नुकसान का दावा किया। सुनवाई में बीमा कंपनी ने क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट के आधार पर दावा निस्तारित करने की शर्त रखी। आयोग ने स्पष्ट किया कि जब फसल पूरी तरह पानी में डूबकर नष्ट हो गई हो तो क्राप कटिंग करना व्यावहारिक नहीं है। केवल क्राप कटिंग डाटा न होने पर दावा रोकना योजना के उद्देश्य के खिलाफ है।
आयोग ने किसान द्वारा जमा 887.88 रुपये प्रीमियम के 100 गुना यानी 88,788 रुपये फसल क्षतिपूर्ति के रूप में तय की। इसके साथ आठ प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के लिए 40 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया। तीन माह में भुगतान न होने पर पूरी राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक दंडात्मक ब्याज के साथ 10 हजार रुपये अतिरिक्त निष्पादन खर्च भी देना होगा।
8 सितंबर 2026 को अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य राजनिश कुमार की पीठ ने यह फैसला सुनाया। आयोग ने बीमा कंपनी को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराया। किसान की फसल बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हो गई थी, इसलिए क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट का न होना उचित कारण नहीं माना गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रीमियम कितना था?
- राजेंद्र शर्मा ने किसान क्रेडिट कार्ड से 887.88 रुपये प्रीमियम जमा किया था।
- उपभोक्ता आयोग ने मुआवजे के अलावा क्या आदेश दिए?
- आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 40,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 20,000 रुपये भी दिए।
- दावा निस्तारण में क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट की क्या भूमिका थी?
- आयोग ने कहा कि बाढ़ से पूरी फसल नष्ट होने पर क्राप कटिंग व्यावहारिक नहीं है।
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