यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस को बोलेरो चोरी का 4.80 लाख ब्याज सहित चुकाने का आदेश
झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की देरी को सेवा दोष माना
झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को बोलेरो चोरी के मामले में 4.80 लाख रुपये और 9 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी की 572 दिन तक क्लेम न निपटाने को सेवा दोष माना और कहा कि बीमा कंपनी को वैध दावे का समय पर निपटारा करना आवश्यक है।
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झुंझुनूं। झुंझुनूं जिला उपभोक्ता आयोग ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को बोलेरो चोरी के मामले में 4 लाख 80 हजार रुपए और 9 प्रतिशत ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया है। आयोग ने बीमा कंपनी की 572 दिन तक क्लेम न निपटाने की लापरवाही को गंभीर सेवा दोष माना।
वाहन की बीमा पॉलिसी 28 नवंबर 2023 से 27 नवंबर 2024 तक प्रभावी थी। 23 नवंबर 2024 की रात करीब 11:45 बजे बोलेरो चोरी हो गया। 24 नवंबर 2024 को खेतड़ी नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। परिवादी ने 26 नवंबर 2024 को बीमा कंपनी को क्लेम आवेदन दिया। पुलिस ने जांच कर वाहन चोरी की पुष्टि की। न्यायिक मजिस्ट्रेट खेतड़ी ने 16 जनवरी 2025 को पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार की। सर्वेयर ने 29 जनवरी 2025 को रिपोर्ट कंपनी को सौंपी।
इसके बावजूद बीमा कंपनी ने क्लेम पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। आयोग ने सर्वेयर रिपोर्ट मिलने के बाद 572 दिन तक देरी को विधिक दायित्व के उल्लंघन और सेवा दोष माना। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी का काम केवल प्रीमियम लेना नहीं, बल्कि वैध दावे का समयबद्ध निस्तारण भी है।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायिक दृष्टांतों का हवाला देते हुए कहा कि क्लेम के अस्वीकार होने पर कारण उपभोक्ता को बताना आवश्यक है। बीमा कंपनी के पास चोरी की घटना से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध थे।
बीमा कंपनी ने एफआईआर दर्ज कराने में देरी, सूचना देने में विलंब और दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां उठाईं, लेकिन आयोग ने एक दिन के अंतर को गंभीर उल्लंघन नहीं माना। आयोग ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के उस निर्णय का भी उल्लेख किया जिसमें सर्वेयर रिपोर्ट के बाद अनावश्यक देरी पर उपभोक्ता को ब्याज का लाभ दिया गया था। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या बीमा कंपनी ने क्लेम अस्वीकार करते हुए उपभोक्ता को कारण बताया?
- आयोग ने कहा कि क्लेम के अस्वीकार होने पर कारण उपभोक्ता को बताना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में बीमा कंपनी ने ऐसा नहीं किया।
- बीमा कंपनी ने कौन-कौन सी आपत्तियां उठाईं?
- कंपनी ने एफआईआर दर्ज कराने में देरी, सूचना देने में विलंब और दस्तावेजों को लेकर आपत्तियां उठाईं।
- क्या एक दिन के अंतर को सेवा दोष माना गया?
- कोई नहीं, आयोग ने एक दिन के अंतर को गंभीर उल्लंघन नहीं माना।
- आयोग ने किन न्यायिक दृष्टांतों का हवाला दिया?
- आयोग ने सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसलों का हवाला दिया।
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