भारत का ब्रिक्स व्यापार घाटा 224 अरब डॉलर तक पहुंचा
चीन और रूस से भारी आयात के कारण भारत को व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा 224 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत-चीन के बीच व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हुआ लेकिन व्यापार घाटा 99.19 अरब डॉलर दर्ज किया गया। चीन और रूस से अधिक आयात के कारण भारत का व्यापार घाटा बढ़ रहा है, जबकि भारत ब्रिक्स समूह के साथ अपने कारोबारी संबंधों को मजबूत कर रहा है।
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भारत। भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटा 224 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-चीन के बीच कुल व्यापार 7.9 प्रतिशत बढ़कर 127.7 अरब डॉलर हो गया, लेकिन भारत का व्यापार घाटा 99.19 अरब डॉलर दर्ज किया गया।
ब्रिक्स देशों के साथ भारत के व्यापार में भारी असंतुलन है। चीन और रूस से आयात अधिक होने के कारण भारत को व्यापार घाटा झेलना पड़ रहा है। अकेले चीन की हिस्सेदारी व्यापार घाटे में 100 अरब डॉलर से अधिक है, जबकि रूस के साथ व्यापार घाटा 55 अरब डॉलर है।
भारत ब्रिक्स का संस्थापक सदस्य है और समूह के साथ कारोबारी संबंध बढ़ा रहे हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर यह घाटा बड़ी चुनौती है। वैश्विक आर्थिक मंच पर ब्रिक्स का प्रभाव बढ़ रहा है, जहां ये देश विश्व की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत और व्यापार का 26 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल निर्यात में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी अलग-अलग है, जबकि आयात में चीन की हिस्सेदारी करीब 17 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से चीन को निर्यात 36.62 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हो गया, वहीं चीन से भारत का आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.62 अरब डॉलर हो गया।
भारत के कुल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत हो गई है। भारत का व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है; 2024-25 में यह 85 अरब डॉलर था, जो 2025-26 में 99.19 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
भारत के चीनी आयात का 98.5 प्रतिशत हिस्सा औद्योगिक उत्पादों का है, जबकि कृषि, ईंधन, रत्न और आभूषणों की हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत से कम है। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और कार्बनिक रसायनों के आयात में चीन की हिस्सेदारी 40 से 44 प्रतिशत के बीच है, जो भारतीय विनिर्माण क्षेत्र के लिए आवश्यक कच्चे माल हैं।
ब्रिक्स देशों में विदेश में रहने वाले हर चार भारतीयों में से एक निवास करता है, जो भारत के सामरिक और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
हालांकि, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन के बीच व्यापार में वृद्धि के बावजूद व्यापार घाटा चिंता का विषय बना हुआ है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि भारत को चीन से अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच केवल 2.51 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला है।
ब्रिक्स देशों के साथ भारत के व्यापार संबंधों में संतुलन लाना आवश्यक है ताकि आर्थिक विकास और सामरिक हितों को संतुलित किया जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत का ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार घाटे का मुख्य कारण क्या है?
- चीन और रूस से उच्च आयात के कारण भारत को व्यापार घाटा हो रहा है।
- ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक मंच में क्या असर है?
- ब्रिक्स देश विश्व की कुल जीडीपी का 40 प्रतिशत और व्यापार का 26 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं।
- भारत के चीन से आयात में प्रमुख वस्तुएं कौन सी हैं?
- इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और कार्बनिक रसायन आयात में प्रमुख हैं, जिनका हिस्सा 40-44 प्रतिशत है।
- भारत को चीन से कितना प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिला है?
- अप्रैल 2000 से मार्च 2026 तक भारत को चीन से 2.51 अरब डॉलर का निवेश मिला है।
- ब्रिक्स देशों में भारत के लिए अन्य महत्वपूर्ण पक्ष क्या हैं?
- विदेश में रहने वाले हर चार भारतीयों में से एक ब्रिक्स देशों में निवास करता है, जो सामरिक और आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
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