सुप्रीम कोर्ट में ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम की बैठक शुरू
22 देशों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी दिल्ली में न्याय व्यवस्था पर चर्चा कर रहे हैं
नई दिल्ली में छह सितंबर तक ब्रिक्स चीफ जस्टिस फोरम की बैठक चल रही है, जिसकी मेजबानी सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। इस दौरान भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ब्रिक्स सदस्य और सहयोगी देशों के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे हैं।
मुख्य सत्र चार अहम विषयों पर केंद्रित हैं: मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक विवाद, मध्यस्थता फैसलों का सीमा-पार कार्यान्वयन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और न्यायपालिका, तथा न्यायिक नेतृत्व और सतत विकास। इस मंच का उद्देश्य विभिन्न देशों की न्यायपालिकाओं के बीच संवाद बढ़ाना और न्याय से जुड़े समकालीन मुद्दों पर विचार-विमर्श करना है।
दुनियाभर के 22 देशों के न्यायिक अधिकारी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें रूस, चीन, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, बेलारूस, कजाखस्तान, दक्षिण अफ्रीका, ईरान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं। इन बैठकों में न्यायिक सहयोग और अनुभव साझा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
बैठकों के बीच ईरान के चीफ जस्टिस अयातुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसिनी-एजेई शुक्रवार को दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद पहुंचे। उन्होंने जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैयद शाबान बुखारी से मुलाकात की और नमाज में शामिल हुए। नमाज के बाद वहां मौजूद लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें लेने की कोशिश की।
यह दृश्य इसलिए खास था क्योंकि ईरान एक शिया बहुल देश है, जबकि जामा मस्जिद सुन्नी इस्लामी परंपरा का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। इस मुलाकात को शिया-सुन्नी सद्भाव की एक अलग तस्वीर माना जा रहा है। मोहसिनी-एजेई ने भारत और ईरान के पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का भी जिक्र किया।
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में उन्होंने भारतीय धार्मिक विद्वानों और नेताओं से भी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जंग को लेकर कहा कि ईरान ने कभी दबाव के आगे सिर नहीं झुकाया और आगे भी नहीं झुकेगा। उन्होंने इतिहास से सीख लेकर वर्तमान और भविष्य को बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
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