नई दिल्ली में 11 सितंबर से BRICS समिट, पुतिन और जिनपिंग होंगे शामिल
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की द्विपक्षीय वार्ता, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक 18वां BRICS समिट आयोजित होगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 सितंबर को पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, और समिट में 11 सदस्य देशों तथा 10 साझेदार देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं और यह भारत की तीसरी बार मेजबानी है।
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नई दिल्ली में 11 से 13 सितंबर तक 18वां BRICS समिट आयोजित होगा, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 सितंबर को पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी तय है।
भारत में BRICS समिट की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस समिट में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान समेत 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के सैकड़ों प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत इस मंच से दुनिया के लिए सकारात्मक संदेश देने का प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में SCO समिट में कहा था कि दुनिया को 'Endless War' से 'End of War' की ओर बढ़ना होगा। BRICS समिट के दौरान भारत रूस और चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करेगा।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात होंगे, साथ ही 100 से अधिक राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडो और एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए जाएंगे। एंटी-एयरक्राफ्ट गन, स्नाइपर और एंटी-सबोटाज टीमें भी सुरक्षा में लगी हैं।
समिट में शामिल होने वाले प्रमुख नेताओं की आगमन सूची भी तैयार है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन 11 सितंबर को अल सुबह करीब 1:15 बजे पालम हवाई अड्डे पर उतरेंगे। उसी दिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, ईरान के राष्ट्रपति, नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति, मिस्र के राष्ट्रपति, संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस, मलेशिया के प्रधानमंत्री, इथियोपिया के प्रधानमंत्री, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति, फिलीपींस के राष्ट्रपति और क्यूबा के विदेश मंत्री नई दिल्ली पहुंचेंगे।
12 सितंबर को बेलारूस के विदेश मंत्री और वियतनाम के प्रधानमंत्री नई दिल्ली आएंगे।
भारत 2012 में पहली बार BRICS का मेजबान बना था। मोदी सरकार के दौरान यह तीसरी बार है जब BRICS समिट भारत में हो रहा है। 2016 और 2021 में भी भारत मेजबान था। 2026 का समिट वैश्विक तनाव के बीच भारत की नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है।
BRICS के जरिये भारत ने वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को एजेंडे में सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इस मंच को जन-केंद्रित दृष्टिकोण और 'मानवता सर्वोपरि' की भावना के साथ आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- BRICS समिट में भारत का क्या उद्देश्य है?
- भारत इस मंच से दुनिया को सकारात्मक संदेश देने और वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को एजेंडे में प्राथमिकता देने का प्रयास करता है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की BRICS समिट में क्या भूमिका होगी?
- मोदी रूस और चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेंगे और समिट में वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करेंगे।
- सुरक्षा के लिए क्या कड़े इंतजाम किए गए हैं?
- एंटी-ड्रोन सिस्टम, एंटी-एयरक्राफ्ट गन, स्नाइपर और एंटी-सबोटाज टीमें भी सुरक्षा में लगी हैं।
- BRICS समिट में कौन-कौन मुख्य अतिथि शामिल होंगे?
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के डायरेक्टर जनरल, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव, दक्षिण अफ्रीका और मिस्र के राष्ट्रपति समेत कई प्रमुख नेता आएंगे।
- भारत ने BRICS समिट की मेजबानी कितनी बार की है?
- मोदी सरकार के दौरान यह तीसरी बार है, इससे पहले 2016 और 2021 में भी भारत मेजबान था।
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