पीएम मोदी ने ब्रिक्स में लोकल करेंसी में व्यापार की बात कही
भारत ने ब्रिक्स के मंच पर नए आर्थिक और कूटनीतिक कदम दिखाए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट में स्थानीय मुद्रा में व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही और सदस्य देशों से सहयोग की अपील की। भारत ने ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप्स के नेटवर्क और फंडिंग के लिए योजनाएं पेश कीं तथा MSMEs के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा। मोदी ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और वैश्विक आर्थिक सहयोग में बढ़ती भूमिका पर भी जोर दिया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स समिट के पहले दिन लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग और स्टार्टअप्स के लिए नए नेटवर्क बनाने की पहल भी पेश की। इस दौरान रूस और ईरान के राष्ट्रपति भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के मंच पर यह साफ कर दिया कि भारत अपनी विदेश नीति स्वतंत्र रूप से चलाता है। उन्होंने कहा कि लोकल करेंसी में व्यापार से सभी देशों को फायदा होगा और इसके लिए जरूरी सिस्टम भी बनाना होगा।
ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत ने सदस्य देशों से इस दिशा में सहयोग की अपील की। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने भी लोकल करेंसी में व्यापार को सबसे अहम बताया।
भारत ब्रिक्स देशों के स्टार्टअप्स को फंडिंग दिलाने और उनके बीच नेटवर्क बनाने की योजना बना रहा है। इससे भारतीय स्टार्टअप्स को दूसरे देशों के इनक्यूबेटर और मार्केट तक पहुंच मिलेगी। छोटे कारोबारियों के लिए ब्रिक्स क्रेडिट मैकेनिज्म भी सेटअप किया जाएगा, जिससे कैश फ्लो के आधार पर क्रेडिट मिल सकेगा।
यह कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म MSMEs, बैंक, ट्रेड एसोसिएशन, टेक्नोलॉजी सेंटर और सरकारी एजेंसियों को जोड़ेगा। इसका लक्ष्य भारतीय MSMEs के लिए दूसरे ब्रिक्स मार्केट्स तक पहुंच आसान करना है।
ब्रिक्स सप्लाई चेन नेटवर्क के तहत भारत की अध्यक्षता में 2026-30 का ग्लोबल वैल्यू चेन एक्शन प्लान आगे बढ़ रहा है। इसमें फार्मा और फूड सिक्योरिटी जैसे सेक्टर्स के लिए सप्लाई चेन और इनवेस्टमेंट प्लैटफॉर्म की संभावना शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स का आयोजन करते हुए कूटनीतिक ताकत दिखाई। यूरोपीय यूनियन भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को फाइनल करने में जुटा है। यूरोपीयन कमिशन ने इससे जुड़ा प्रस्ताव यूरोपीय काउंसिल में बढ़ा दिया है।
भारत और चीन के बीच नरमी आई है और शी जिनपिंग के साथ पीएम मोदी की बातचीत में बॉर्डर विवाद सुलझाए बिना व्यापार में रफ्तार लाने पर जोर दिया जा सकता है। दोनों देश व्यापारिक रास्ता तलाशने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी विचार कर सकते हैं।
ब्रिक्स को एंटी अमेरिका और एंटी डॉलर मानकर ट्रंप चिढ़ते रहे हैं, लेकिन पीएम मोदी ने ट्रंप का कोई लोड नहीं लिया और ब्रिक्स की धमाकेदार शुरुआत की। भारत ने दिखा दिया कि नया भारत अपने हिसाब से चलता है।
कांग्रेस के कई नेताओं ने भी माना कि ब्रिक्स समिट कोई मामूली बात नहीं है।
इस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स के मंच से वैश्विक कूटनीति और आर्थिक सहयोग में भारत की बढ़ती भूमिका को स्पष्ट किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रिक्स में लोकल करेंसी व्यापार से क्या फायदा होगा?
- लोकल करेंसी बाजार में लेनदेन को आसान और खर्च कम करेगा, जिससे देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
- ब्रिक्स स्टार्टअप नेटवर्क का उद्देश्य क्या है?
- यह नेटवर्क भारतीय स्टार्टअप्स को दूसरे ब्रिक्स देशों के इनक्यूबेटर और मार्केट से जोड़कर विकास में मदद करेगा।
- ब्रिक्स के सप्लाई चेन नेटवर्क में कौन से सेक्टर्स शामिल हैं?
- इस योजना में फार्मा और फूड सिक्योरिटी जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर्स के सप्लाई चेन और निवेश प्लेटफॉर्म की संभावना है।
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