ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान नई दिल्ली पहुंचे, पीएम मोदी से करेंगे बैठक
18वें ब्रिक्स सम्मेलन में आर्थिक, वित्तीय और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होगी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के आर्थिक और व्यापारिक सहयोग, डॉलर पर निर्भरता कम करने सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। ब्रिक्स समूह में अब 11 देश शामिल हैं, जो वैश्विक आबादी, GDP और व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों और सहयोग पर चर्चा होगी।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। इस सम्मेलन में ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक और व्यापार से जुड़े अहम विषयों पर चर्चा होगी।
पेजेशकियान ने कहा, "इस सम्मेलन में स्वतंत्रता, एकजुटता, स्थिरता, प्रतिरोध और इनोवेशन जैसे मुद्दों पर बात होगी।" उन्होंने बताया कि ब्रिक्स के भीतर एक विशेष बैंक बनाया गया है, जो सदस्य देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देगा और डॉलर पर निर्भरता कम करेगा। इससे अमेरिकी डॉलर के आधिपत्य को कम करने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "वैश्विक व्यापार की प्रगति तभी संभव है, जब समुद्री मार्ग सुरक्षित हों, सप्लाई रूट खुले रहें और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।" रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में ढांचागत और गहरे बदलाव की बात कही है।
ब्रिक्स समूह में अब कुल 11 देश शामिल हैं, जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात हैं। ये देश दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49.5%, वैश्विक जीडीपी का 40% और वैश्विक व्यापार का 26% हिस्सा कवर करते हैं।
ब्रिक्स का मुख्य उद्देश्य दुनिया में एकतरफावाद का मुकाबला करना और डॉलर पर निर्भरता को कम करना है। इस सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच करेंसी रिस्क को मैनेज करने और आपसी सेटलमेंट के लिए जरूरी साधन स्थापित करने पर भी चर्चा होगी।
पेजेशकियान ने भारत और ईरान के पुराने रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देश अपनी समानताओं का दायरा बढ़ा सकते हैं। भारत यात्रा के दौरान उनका चीन, रूस, ब्राजील और अन्य देशों के अधिकारियों से मिलने का भी कार्यक्रम है।
दोनों नेता इससे पहले बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए भारत के समर्थन को दोहराया था।
मौजूदा समय में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और जलवायु परिवर्तन के बीच भारत की अध्यक्षता ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में किन विषयों पर चर्चा होगी?
- सम्मेलन में आर्थिक, वित्तीय, औद्योगिक, व्यापार, करेंसी रिस्क, और आपसी सेटलमेंट पर चर्चा होगी।
- मसूद पेजेशकियान ने ब्रिक्स के विशेष बैंक के बारे में क्या कहा?
- उन्होंने बताया कि यह बैंक निवेश बढ़ाएगा और डॉलर के आधिपत्य को कम करेगा।
- पीएम मोदी ने वैश्विक व्यापार के बारे में क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि व्यापार तभी बढ़ेगा जब समुद्री मार्ग सुरक्षित और सप्लाई रूट खुला होगा।
- ब्रिक्स समूह में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
- ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, और UAE।
- पेजेशकियान की भारत यात्रा के दौरान और किन देशों के अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम है?
- उनका चीन, रूस, ब्राजील और अन्य देशों के अधिकारियों से भी मिलने का कार्यक्रम है।
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