आईसीएआर ने मिल्की मशरूम की नई उन्नत प्रजाति डीएमआरओ-382 विकसित की
यह प्रजाति 28-32 डिग्री तापमान में उगाई जा सकेगी और औसतन 36 दिन में फसल तैयार होगी
आईसीएआर-मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने मिल्की मशरूम की नई प्रजाति डीएमआरओ-382 विकसित की है, जो उच्च उपज और औषधीय गुणों के साथ मैदानी व गर्म क्षेत्रों में उगाई जा सकेगी। इस मशरूम का तीन वर्षों तक परीक्षण किया गया है और इसे किसानों के लिए नए व्यावसायिक विकल्प के रूप में पेश किया गया है। बीज उत्पादकों को इसकी आपूर्ति 15 दिन में उपलब्ध कराई जाएगी।
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भीलवाड़ा। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित आईसीएआर-मशरूम अनुसंधान निदेशालय ने मिल्की मशरूम की नई उन्नत प्रजाति डीएमआरओ-382 विकसित की है। यह किस्म उच्च उपज और औषधीय गुणों से भरपूर है और मैदानी व गर्म क्षेत्रों में उगाई जा सकेगी।
डीएमआरओ-382 प्रजाति ने विभिन्न क्षेत्रों और मौसमों में समान और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। इस मशरूम में मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले पोषक तत्व मौजूद हैं। तीन वर्षों तक देशभर के पांच केंद्रों में परीक्षण के बाद इसे गुवाहाटी में आयोजित सेमिनार में मान्यता दी गई।
इस किस्म की औसत जैविक दक्षता 47.1 प्रतिशत दर्ज की गई है और एक फल का औसत भार 49.9 ग्राम है। गेहूं और धान के भूसे दोनों पर सफलतापूर्वक इसका परीक्षण किया गया, जिससे किसानों को स्थानीय कृषि अवशेषों पर खेती का अवसर मिलेगा।
किसानों के लिए यह व्यावसायिक मशरूम उत्पादन में लाभकारी विकल्प साबित होगी। बीज उत्पादकों को इसकी आपूर्ति 15 दिन में उपलब्ध कराई जाएगी।
भीलवाड़ा जिले में रबी सीजन के लिए किसान सरसों की खेती की तैयारी कर रहे हैं। राजस्थान के लिए अनुशंसित सरसों की किस्मों में DRMRIJ-31 (गिरिराज) शामिल है, जो समय पर बोई जाने वाली फसल के लिए उपयुक्त है।
कम अवधि और रोग सहनशीलता को प्राथमिकता देने वाले किसान RH 1424 और RH 1706 किस्मों पर ध्यान दे सकते हैं, जिनकी परिपक्वता क्रमशः 139 और 140 दिन है। ये किस्में उत्तरी राजस्थान के लिए अनुशंसित हैं और कई रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी हैं।
किसानों को केवल किस्म पर निर्भर रहने के बजाय समय पर बुवाई, प्रमाणित बीज, उचित नमी, संतुलित खाद और फसल की निगरानी पर भी ध्यान देना चाहिए। रोग आने के बाद नियंत्रण के बजाय शुरुआत से ही स्वस्थ बीज और उचित दूरी रखना फायदेमंद रहता है।
आईसीएआर-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान ने NRCHB-506 हाइब्रिड और DRMRIJ-31 जैसी किस्मों के व्यावसायिक प्रसार के लिए कदम उठाए हैं। भीलवाड़ा के किसान समय पर सरसों की बुवाई कर बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। कृषि विभाग से खेत की मिट्टी, सिंचाई और बुवाई की तारीख के अनुसार किस्म की पुष्टि करना जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- डीएमआरओ-382 मशरूम किन क्षेत्रों में उगाई जा सकती है?
- यह प्रजाति मैदानी और गर्म क्षेत्रों में उगाई जा सकती है, जिससे विभिन्न जलवायु वाले क्षेत्र इसका उत्पादन कर सकते हैं।
- डीएमआरओ-382 प्रजाति का परीक्षण कैसे किया गया?
- इस प्रजाति का परीक्षण तीन वर्षों तक देशभर के पांच केंद्रों में किया गया और बाद में गुवाहाटी में आयोजित सेमिनार में इसे मान्यता मिली।
- सरसों की कौन-कौन सी किस्में राजस्थान के लिए अनुशंसित हैं?
- राजस्थान के लिए DRMRIJ-31 (गिरिराज), RH 1424, और RH 1706 किस्मों को अनुशंसित किया गया है।
- सरसों की खेती में किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- किसानों को सही समय पर बुवाई, प्रमाणित बीज, उचित नमी, संतुलित खाद और फसल की अच्छी निगरानी करनी चाहिए।
- आईसीएआर-भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान ने क्या कदम उठाए हैं?
- संस्थान ने NRCHB-506 हाइब्रिड और DRMRIJ-31 किस्मों के व्यावसायिक प्रसार के लिए प्रयास शुरू किए हैं।
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