हिमाचल में भूस्खलन से 78 सड़कें बंद, 12 सितंबर तक बारिश जारी
राज्य में मानसून सक्रिय, बिजली और पेयजल योजनाएं भी प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण भूस्खलन से 78 सड़कें बंद हो गई हैं और 12 सितंबर तक बारिश जारी रहने की संभावना है। राज्य में बिजली ट्रांसफार्मर, पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं और मानसून के सीजन में अब तक 274 लोगों की मौत हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मानसून से कुल 1,242 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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हिमाचल प्रदेश में मानसून की सक्रियता के कारण कई इलाकों में रुक-रुक कर बारिश हो रही है। इससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ गई हैं और राज्य में 78 सड़कें बंद हो गई हैं। मौसम विभाग ने 12 सितंबर तक बारिश की संभावना जताई है, लेकिन भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार रविवार शाम तक कुल 12 बिजली ट्रांसफार्मर और आठ पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। इनमें शिमला के रामपुर की पांच और चंबा के भटियात की दो पेयजल योजनाएं शामिल हैं।
बारिश के कारण मंडी जिले के सराज उपमंडल में सबसे अधिक 29 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा मंडी के सरकाघाट में तीन, थलौट में दो तथा सुंदरनगर और करसोग में एक-एक सड़क अवरुद्ध है। कुल्लू जिले के आनी में 12, निरमंड में चार, कुल्लू उपमंडल में चार और बंजार में दो सड़कें बंद हैं। कांगड़ा जिले में सात, सिरमौर में पांच, ऊना में तीन, सोलन में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है।
बीते 24 घंटों में बिलासपुर के नैना देवी में 46.2 मिलीमीटर, मंडी के जोगिंदरनगर में 39 मिलीमीटर, शिमला के सराहन में 30.1 मिलीमीटर, सिरमौर के धौलाकुआं एडब्ल्यूएस में 26.5 मिलीमीटर और जटोन बैराज में 24 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। शिमला के चौपाल, सोलन के कसौली और किन्नौर के वांगतू में भी 20 से 23 मिलीमीटर बारिश हुई।
शिमला, जुब्बड़हट्टी, कांगड़ा, सुंदरनगर और मुरारी देवी में गरज के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सात से 10 सितंबर तक कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। 11 और 12 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है, लेकिन इन दिनों भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस मानसून सीजन में अब तक 274 लोगों की मौत हुई है और 493 लोग घायल हुए हैं। इनमें 164 की मौत सड़क हादसों में हुई है, जबकि 110 की मौत भूस्खलन, बाढ़, पानी में बहने, फिसलने और पहाड़ी से गिरने जैसी घटनाओं में हुई है। मानसून के दौरान 467 मवेशियों की भी मौत हुई है।
प्रदेश में 122 मकान पूरी तरह और 488 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 17 दुकानें और 460 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। सरकारी आकलन के अनुसार मानसून से अब तक करीब 1,242 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 951 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कौन-कौन से जिले प्रभावित हुए हैं?
- मंडी, कुल्लू, कांगड़ा, सिरमौर, ऊना, सोलन और लाहौल-स्पीति समेत कई जिले प्रभावित हैं।
- कितने मकान और पशुशालाएं नुकसान झेल चुकी हैं?
- 122 मकान पूरी तरह और 488 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, साथ ही 460 पशुशालाएं भी प्रभावित हुई हैं।
- मानसून के दौरान मवेशियों का क्या नुकसान हुआ है?
- इस मानसून में 467 मवेशियों की मौत हो चुकी है।
- बारिश का औसत स्तर कितना था पिछले 24 घंटे में?
- नैना देवी में 46.2 मिलीमीटर से लेकर जटोन बैराज में 24 मिलीमीटर तक बारिश रिकॉर्ड की गई।
- प्रदेश में कितनी बिजली और पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं?
- अब तक 12 बिजली ट्रांसफार्मर और आठ पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
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