स्कूलों में किशोरों में नशे का खतरा बढ़ा, गुवाहाटी में स्थिति गंभीर
आईसीएमआर के छह शहरों में 6,168 किशोरों पर अध्ययन में नशे के जोखिम के कारण और प्रभाव सामने आए
आईसीएमआर के छह शहरों के स्कूलों में पढ़ने वाले किशोरों में नशे का खतरा बढ़ा है, जिसमें गुवाहाटी के 42.3 प्रतिशत किशोर मध्यम या अधिक जोखिम वाले पाए गए हैं। अध्ययन में मोबाइल और इंटरनेट के अधिक उपयोग को भी नशे के जोखिम से जोड़ा गया है। इसके अलावा, कोशी बेसिन क्षेत्र में आपदा प्रबंधन की चुनौतियां संस्थागत समन्वय की कमी और स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारियों के कारण बढ़ रही हैं।
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आईसीएमआर के छह शहरों में स्कूलों में पढ़ने वाले किशोरों में नशे का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। गुवाहाटी में 42.3 प्रतिशत किशोर मध्यम या ज्यादा जोखिम वाली श्रेणी में पाए गए। अध्ययन में मोबाइल और इंटरनेट के अधिक उपयोग को भी जोखिम से जोड़ा गया है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने अक्तूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच गोरखपुर, गुवाहाटी, नागपुर, राजकोट, देवघर और पुडुचेरी के 108 स्कूलों में 10 से 19 साल के 6,168 किशोरों का अध्ययन किया। इसमें 21.4 प्रतिशत किशोर मध्यम या ज्यादा नशा-जोखिम वाली श्रेणी में पाए गए। गुवाहाटी में यह प्रतिशत 42.3, देवघर में 41.3, गोरखपुर में 24.5, राजकोट में 13.5, नागपुर में 7.1 और पुडुचेरी में 0.1 था।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन किशोरों को नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध होते हैं और जो मोबाइल-इंटरनेट की दुनिया में अधिक समय बिताते हैं, उनमें नशे से जुड़ी जोखिम की संभावना अधिक रहती है। गोरखपुर में लड़कियों पर खतरा लड़कों की तुलना में ज्यादा था।
दूसरे शोध में कोशी बेसिन में आपदा जोखिम को लेकर संस्थागत समन्वय की कमी और स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारियों के कारण आपदा प्रबंधन में चुनौतियां सामने आई हैं। कोशी नदी बेसिन तिब्बत, नेपाल और भारत में फैला है और यहां ग्लेशियल झील फटने से बाढ़, भूस्खलन, सूखा जैसी घटनाएं होती रहती हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि आपदा जोखिम केवल प्राकृतिक खतरों से नहीं बढ़ता, बल्कि विभागों के बीच असमान समन्वय, प्राथमिकताओं में भिन्नता और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को निर्णय प्रक्रिया में सीमित जगह मिलने से भी जोखिम बढ़ता है। स्थानीय अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की सलाह दी गई है।
भारत और नेपाल के बीच सीमा पार सहयोग के लिए औपचारिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन संस्थागत सहयोग की प्रक्रियाएं अभी विकसित हो रही हैं। शोधकर्ताओं ने निचले कोशी बेसिन के लिए सिस्टमेटिक रिस्क गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने का सुझाव दिया है, जिससे जोखिमों की पहचान, निगरानी और प्रबंधन बेहतर तरीके से हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अध्ययन कब और कहां किया गया था?
- अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच गोरखपुर, गुवाहाटी, नागपुर, राजकोट, देवघर और पुडुचेरी के 108 स्कूलों में अध्ययन किया गया।
- गोरखपुर में लड़कियों और लड़कों में नशे का खतरा कैसा है?
- गोरखपुर में लड़कियों पर नशे का खतरा लड़कों की तुलना में ज्यादा पाया गया है।
- कोशी बेसिन में आपदा जोखिम के क्या मुख्य कारण हैं?
- आपदा जोखिम में विभागों के बीच असमान समन्वय, प्राथमिकताओं में भिन्नता और स्थानीय समुदायों की सीमित भागीदारी मुख्य कारण हैं।
- आपदा प्रबंधन में सुधार के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
- स्थानीय अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने और कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की सलाह दी गई है।
- भारत-नेपाल सीमा पार सहयोग की क्या स्थिति है?
- भारत और नेपाल के बीच सीमा पार सहयोग के लिए औपचारिक व्यवस्था मौजूद है, लेकिन संस्थागत सहयोग की प्रक्रियाएं अभी विकसित हो रही हैं।
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