डूंगरपुर में महिलाओं ने श्रद्धा से मनाई हरतालिका तीज
मिट्टी की शिव-पार्वती प्रतिमाएं बनाकर पूजा, निर्जला व्रत रखा गया
डूंगरपुर में भाद्रपद शुक्ल तृतीया को महिलाओं ने हरतालिका तीज के अवसर पर निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की। विभिन्न शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी और महिलाएं सातों श्रृंगार कर पूजा-अर्चना में सहभागी हुईं। व्रत के दौरान कथा श्रवण, भजन-कीर्तन और जागरण भी आयोजित किए गए।
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डूंगरपुर। डूंगरपुर में रविवार को भाद्रपद शुक्ल तृतीया पर हरतालिका तीज श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की।
शहर के नया महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर शिवालय हाउसिंग बोर्ड और धनेश्वर शिवालय समेत विभिन्न शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ रही। महिलाओं ने सातों श्रृंगार कर भगवान शिव-पार्वती का पूजन किया।
केवड़े के पुष्प, कुमकुम सहित पूजन सामग्री अर्पित कर आराधना की गई। कई घरों में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा कर हरतालिका तीज की कथा सुनी।
माना जाता है कि माता पार्वती ने कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था। इसी परंपरा के तहत महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार के कल्याण की कामना से निर्जला उपवास रखती हैं।
व्रत के दौरान महिलाओं ने शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेशजी की प्रतिमाएं बनाकर स्थापित कीं। इसके बाद केवड़े के फूल, कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री से भगवान शिव-पार्वती की पूजा की।
दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाओं ने हरतालिका तीज की कथा का श्रवण किया। कई स्थानों पर रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण कर भगवान शिव-पार्वती का स्मरण किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हरतालिका तीज का व्रत क्यों रखा जाता है?
- यह व्रत पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है।
- महिलाएं व्रत के दौरान क्या खास करती हैं?
- वे शुद्ध मिट्टी से शिव-पार्वती और गणेशजी की मूर्तियां बनाकर पूजन करती हैं।
- पूजा के दौरान कौन-कौन सी सामग्री प्रयोग होती हैं?
- केवड़े के पुष्प, कुमकुम सहित अन्य पारंपरिक पूजन सामग्रियों का उपयोग होता है।
- हरतालिका तीज का धार्मिक कथानक क्या है?
- माता पार्वती ने कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था।
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