दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में पांच आरोपियों को जमानत
राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीईओ समेत पांच आरोपियों को दो-दो लाख रुपये के मुचलके पर रिहाई का आदेश दिया
दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट घोटाले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक सबूत पर्याप्त नहीं हैं और आरोपियों के भागने या सबूत छेड़छाड़ का खतरा नहीं है। इस मामले की जांच और सुनवाई जारी है।
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दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट घोटाले में गिरफ्तार पांच आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट ने जमानत दे दी है। अदालत ने उन्हें दो-दो लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
यह मामला मई 2024 में सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के विकास और अपग्रेडेशन के लिए हुई निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, निविदा शर्तों में फेरबदल किया गया और आपराधिक साजिश रची गई।
राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राज कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा और अंकित श्रीवास्तव को जमानत दी है। अदालत ने कहा कि प्रस्तुत सबूत प्रारंभिक रूप से पर्याप्त नहीं हैं कि आरोपियों को राहत न दी जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के दौरान आरोपियों के भागने का खतरा नहीं है और न ही सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को डराने-धमकाने की संभावना है। मामले की आगे की जांच, पूछताछ और सुनवाई के लिए आरोपियों के उपलब्ध रहने पर कोई संदेह नहीं है।
इससे पहले आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भी इसी मामले में 3 अगस्त को जमानत दी जा चुकी है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरोप लगाया था कि निविदा की शर्तों में जानबूझकर फेरबदल किया गया था और प्रक्रिया को तकनीकी केंद्रित बनाया गया था।
जांच के अंतिम दौर में बिना ठोस वजह और हालात में बदलाव के अचानक गिरफ्तारी करने को अदालत ने मनमाना कदम बताया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कौन-कौन आरोपियों को जमानत मिली है?
- पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राज कुमार कुर्रा, पंकज वर्मा और अंकित श्रीवास्तव को जमानत मिली है।
- अदालत ने जमानत क्यों दी?
- अदालत ने कहा कि प्रारंभिक सबूत पर्याप्त नहीं हैं और आरोपियों के भागने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा नहीं है।
- घोटाले से जुड़ी मुख्य अनियमितताएं क्या थीं?
- निविदा प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं, शर्तों में फेरबदल और आपराधिक साजिश रची गई थी।
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