बांदनवाड़ा के फौजी ने मृत पत्नी के अंग दान कर छह मरीजों को जीवन दिया
ब्रेन डेड घोषित संजू गुर्जर के अंगों को अलग-अलग शहरों के अस्पतालों में पहुंचाया गया
बांदनवाड़ा के भारतीय सेना के जवान सांवरलाल गुर्जर ने ब्रेन डेड घोषित अपनी पत्नी संजू गुर्जर के अंगदान का निर्णय लिया। उनके अंग दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ और रोहतक के अस्पतालों में छह जरूरतमंद मरीजों को जीवन देने के लिए भेजे गए।
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बांदनवाड़ा। बांदनवाड़ा के ग्राम पड़ांगा निवासी भारतीय सेना के जवान सांवरलाल गुर्जर ने अपनी ब्रेन डेड घोषित पत्नी संजू गुर्जर के अंगदान का निर्णय लेकर मिसाल पेश की। उनके अंग दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ और रोहतक के अस्पतालों में जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी देने के लिए भेजे गए।
संजू गुर्जर (30) की तबीयत मस्तिष्क की नस फटने के बाद गंभीर हो गई थी और उन्हें पंचकूला स्थित कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने मंगलवार रात संजू को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन समय में सांवरलाल और उनके परिवार ने संजू के अंगदान का फैसला लिया।
परिजनों की सहमति से संजू के अंगों को सुरक्षित तरीके से अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया। उनके अंग दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़ और रोहतक के अस्पतालों तक पहुंचाए गए। अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ एयरपोर्ट और पंचकूला से रोहतक तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
संजू की किडनी लेकर एंबुलेंस रोहतक स्थित पीजीआईएमएस पहुंची। उनके कॉर्निया को कमांड अस्पताल में दो मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया से छह मरीजों को नई जिंदगी मिलने की उम्मीद है।
पत्नी को खोने के दर्द के बीच सांवरलाल ने कहा, "अगर उनकी पत्नी के अंगों से किसी की जान बच सके तो इससे उनकी आत्मा को शांति मिलेगी।" परिवार ने इसी भावना के साथ अंगदान की प्रक्रिया पूरी करवाई।
गुरुवार को संजू का अंतिम संस्कार उनके पैतृक ग्राम पड़ांगा में किया गया। वह अपने पीछे तीन और एक वर्ष के दो मासूम बच्चे छोड़ गईं, जिन्हें मां के निधन का अहसास तक नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- संजू गुर्जर की बीमारी क्या थी?
- संजू की मस्तिष्क की नस फटने के कारण उनकी तबीयत गंभीर हो गई थी।
- संजू के बच्चों की उम्र क्या है?
- संजू के तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो बच्चे एक वर्ष के मासूम हैं।
- सांवरलाल ने अंगदान पर क्या भावना व्यक्त की?
- सांवरलाल का मानना है कि अंगों से किसी की जान बचाने से उनकी पत्नी की आत्मा को शांति मिलेगी।
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