नेपाल में बाढ़ से 1340 मौतें, 5000 लोग लापता
26 अगस्त की आपदा से 32,000 परिवार विस्थापित, सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस
नेपाल में अगस्त की बाढ़ के कारण अब तक 1340 लोगों की मौत हुई है और लगभग 5000 लोग लापता हैं। इस आपदा से 32,000 से अधिक परिवार विस्थापित हुए हैं, जबकि भारतीय सेना और अन्य संगठन बचाव कार्यों में मदद कर रहे हैं। नेपाल सरकार ने राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है और देशभर में शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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नेपाल में 26 अगस्त को आई भयंकर बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा में अब तक 1340 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 5000 लोग लापता हैं। नेपाल सरकार ने सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया है।
बाढ़ से घर, सड़क, पुल और हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान पहुंचा है। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी है। सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश तेज हो गई है।
नेपाल में मौजूद भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और सीमा सड़क संगठन वैकल्पिक रास्ते बना रहे हैं। इस आपदा से कम से कम 32,000 परिवार विस्थापित हुए हैं।
नेपाल के विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। बिहार-नेपाल सीमा के रक्सौल से सटे बीरगंज महानगरपालिका के घंटाघर चौक पर दीप प्रज्वलन कर दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की गई।
नेपाल के गृह मंत्रालय ने बताया कि सोमवार को देशभर के सरकारी कार्यालय और विदेशों में नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के 13वें दिन को शोक अवधि का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बाढ़ से किन प्रकार के नुकसान हुए?
- बाढ़ ने घर, सड़क, पुल और हाईड्रो पावर प्रोजेक्ट को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
- खोज और बचाव अभियान कहाँ चल रहे हैं?
- सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी हैं, खासकर सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश तेज हो गई है।
- आपदा में भारतीय सेना की क्या भूमिका है?
- भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और सीमा सड़क संगठन वैकल्पिक रास्ते बना रहे हैं।
- राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान क्या कार्य होंगे?
- सरकारी कार्यालय और नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी।
- शोक अवधि का 13वां दिन क्या महत्व रखता है?
- हिंदू मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के 13वें दिन को शोक अवधि का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।
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