अखिलेश ने लोहिया ट्रस्ट से शिवपाल को हटाया, परिवार में फिर विवाद
2027 विधानसभा चुनाव से पहले चाचा-भतीजे के बीच ट्रस्ट की कमान को लेकर टकराव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से शिवपाल यादव को हटा दिया है और ट्रस्ट की जिम्मेदारी खुद संभाल ली है। इससे परिवार में फिर से विवाद की स्थिति बन गई है, जबकि 2022 के चुनाव में दोनों के बीच सुलह हुई थी।
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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोहिया ट्रस्ट के अध्यक्ष पद से चाचा शिवपाल यादव को हटा दिया है। अब ट्रस्ट की जिम्मेदारी अखिलेश यादव के हाथ में आ गई है, जिससे परिवार में फिर विवाद की खबरें सामने आई हैं।
2016 में चाचा-भतीजे के बीच पार्टी की कमान को लेकर भयंकर लड़ाई हुई थी, जिसके कारण 2017 के विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों को नुकसान हुआ था। इसके बाद शिवपाल यादव ने 29 अगस्त 2018 को सपा से अलग होकर अपनी नई पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का गठन किया था।
शिवपाल यादव के भाजपा के साथ जाने की भी अटकलें लगीं, लेकिन वे बाजार में ही रहीं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के बीच सुलह हुई और शिवपाल यादव ने सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा। 8 दिसंबर 2022 को उन्होंने अपनी पार्टी का आधिकारिक रूप से समाजवादी पार्टी में विलय कर दिया।
2024 के लोकसभा चुनाव में चाचा-भतीजे ने मिलकर चुनाव लड़ा और सपा को 37 सीटों की बड़ी सफलता मिली। अब 2027 विधानसभा चुनाव के करीब, ट्रस्ट की कमान को लेकर विवाद फिर उभर रहा है। 2017 से शिवपाल यादव लोहिया ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन अब अखिलेश यादव के पास पार्टी के साथ-साथ ट्रस्ट की पूरी कमान आ गई है।
मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारी रामगोपाल यादव से लेकर शिवपाल यादव को सौंपी गई थी। इस मामले पर यूपी सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा, 'शिवपाल यादव को लेकर अखिलेश यादव के मन में जिस तरह की परिस्थिति और असहजता रही है, वह जगजाहिर है। लगता है कि 2026 की घटनाओं को अखिलेश यादव अभी भूले नहीं हैं।'
सुभासपा प्रमुख और मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, 'अखिलेश यादव तनिक भी शिवपाल यादव पर भरोसा नहीं करते हैं।' उन्होंने समाजवादी पार्टी की सच्चाई उजागर करते हुए कहा कि पार्टी में चोर, उचक्के, शराब माफिया और गरीबों की जमीन लूटने वाले आ गए हैं, इसलिए शिवपाल यादव को ट्रस्ट से हटा दिया गया है।
सपा प्रवक्ता दीपक मिश्रा ने कहा, 'भाजपा नेताओं को देश, राष्ट्र, जेपी, लोहिया, सामाजिक सद्भाव जैसी चीजों से कोई मतलब नहीं है।'
पारिवारिक विवाद का इतिहास
2017 के विधानसभा चुनाव में चाचा-भतीजे के बीच मतभेद के कारण समाजवादी पार्टी को कई सीटों पर नुकसान हुआ था। इसके बाद शिवपाल यादव ने अलग पार्टी बनाई और भाजपा के साथ जाने की खबरें भी आईं, जो सही साबित नहीं हुईं।
2022 में सुलह के बाद शिवपाल यादव ने अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय किया और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया। अब ट्रस्ट की कमान को लेकर विवाद फिर से शुरू हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारी किस-किस को सौंपी गई थी?
- मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारी रामगोपाल यादव से लेकर शिवपाल यादव को सौंपी गई थी।
- यूपी सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने इस विवाद पर क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के मन में शिवपाल यादव को लेकर असहजता है और 2026 की घटनाओं को वे अभी भी नहीं भूले हैं।
- सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के बारे में क्या टिप्पणी की?
- उन्होंने कहा कि पार्टी में चोर, उचक्के, शराब माफिया और गरीबों की जमीन लूटने वाले आ गए हैं, इसलिए शिवपाल को हटाया गया।
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