श्रीनगर में वंदे मातरम विवाद, कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस आमने-सामने
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला ने पूरे गीत के सम्मान में खड़े होने पर कांग्रेस ने जताई आपत्ति
श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच विवाद हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पूरे गीत के सम्मान में खड़े थे, जबकि कांग्रेस ने इससे आपत्ति जताई। भाजपा ने भी कांग्रेस पर निंदा करते हुए उसे कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुकने का आरोप लगाया।
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श्रीनगर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला मंच पर पूरे गीत के सम्मान में खड़े थे, जबकि कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई।
उन्होंने बताया कि यह निर्णय स्वतंत्रता सेनानियों की बहुलतावादी सोच और 1937 के फैसले के अनुसार लिया गया है। वेणुगोपाल ने कहा, "यह गीत को सांप्रदायिक रंग दिए जाने से बचाने के लिए सोच-समझकर किया गया फैसला था और आज भी यह खतरा उतना ही वास्तविक है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस निर्णय में रवींद्रनाथ टैगोर के परामर्श का महत्वपूर्ण योगदान था।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को जवाब देते हुए कहा कि गठबंधन सहयोगी होने का मतलब यह नहीं कि कोई दल दूसरे पर अपनी शर्तें थोपे। एनसी नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी लोगों पर कुछ थोपने के खिलाफ है।
बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की आपत्ति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, "पूरे वंदे मातरम के गायन पर कांग्रेस की आपत्ति से साफ है कि वह 21वीं सदी की नई मुस्लिम लीग बन गई है।" त्रिवेदी ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई है और अब वह कट्टरपंथी ताकतों के सामने पूरी तरह झुक गई है।
वंदे मातरम विवाद ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच वैचारिक मतभेद को उजागर कर दिया है। दोनों दल इंडिया गठबंधन के सदस्य हैं, लेकिन राष्ट्रगीत के गायन को लेकर उनका रुख अलग है। कांग्रेस अपने तय राजनीतिक और ऐतिहासिक रुख पर कायम है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि सहयोगी दलों को स्वतंत्रता सेनानियों के विवेक और निर्णय का सम्मान करते हुए केवल उसी संस्करण को गाना चाहिए जिसे उन्होंने अपनाया हो।
यह विवाद श्रीनगर के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शुरू हुआ, जहां पूरे गीत के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला सम्मान में खड़े थे। कांग्रेस ने इस पर आपत्ति जताई और अपने सहयोगी दल से इस फैसले का सम्मान करने की अपील की। इसके बाद दोनों दलों के बीच सार्वजनिक बयानबाजी शुरू हो गई।
बीजेपी ने भी कांग्रेस पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलगाववादी और कट्टरपंथी ताकतों के सामने झुक गई है। भाजपा नेता आरएस पठानिया ने भी कांग्रेस को घेरा।
अब यह देखना बाकी है कि यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहेगा या गठबंधन की राजनीति में इसका असर भी दिखाई देगा।
पार्टी के सहयोगियों को भी उस फैसले का सम्मान करना चाहिए, जिसके तहत कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो अंतरे गाती है.
केसी वेणुगोपाल, कांग्रेस महासचिव
उमर अब्दुल्ला और फारूक अब्दुल्ला इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं.
कपिल सिंह, नेता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस ने पूरे गीत के गायन पर आपत्ति क्यों जताई?
- कांग्रेस का रुख है कि अपने कार्यक्रमों में केवल वंदे मातरम के दो अंतरे गाए जाएं, जो स्वतंत्रता सेनानियों की बहुलतावादी सोच और 1937 के फैसले पर आधारित है।
- नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस को क्या जवाब दिया?
- नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि गठबंधन सहयोगी होना मतलब शर्तें थोपना नहीं है और लोगों पर कुछ थोपना गलत है।
- केसी वेणुगोपाल ने इस फैसले का समर्थन कैसे किया?
- उन्होंने बताया कि पूरे गीत को सांप्रदायिक रंग से बचाने के लिए यह फैसला सोच-समझकर लिया गया था और रवींद्रनाथ टैगोर के परामर्श का इसमें महत्वपूर्ण योगदान था।
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