संयुक्त राष्ट्र ने भारत के छात्र आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया की सराहना की
युवा नेताओं से बातचीत को बल प्रयोग से बेहतर बताया, चीन-पाक को मानवाधिकार सुधार की सलाह
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने भारत सरकार की हाल के छात्र आंदोलन के दौरान युवा नेताओं के साथ बातचीत करने की प्रतिक्रिया की सराहना की है। उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि यह तरीका बल प्रयोग से बेहतर है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देता है। उन्होंने भारत के इस मॉडल को अन्य देशों के दमनकारी उपायों से अलग बताया।
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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र में भारत के हाल के छात्र आंदोलन को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया की प्रशंसा की गई। उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि युवा नेताओं के साथ बातचीत करना बल के अत्यधिक इस्तेमाल से कहीं अधिक प्रभावी तरीका है। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी को सरकार और नागरिकों के बीच भरोसा बनाने के लिए जरूरी बताया।
दिल्ली में हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन हुआ था, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी ने किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने सीजेपी नेताओं से बातचीत कर उनकी तीन प्रमुख मांगें मान लीं, जिससे आंदोलन समाप्त हो गया।
तुर्क ने 7 सितंबर को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र को संबोधित करते हुए भारत का उदाहरण देते हुए बताया कि सरकारों को सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों और युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों पर कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने कहा, "भारत में हाल के छात्र आंदोलन ने दिखाया है कि सबसे अच्छी प्रतिक्रिया युवा नेताओं के साथ बातचीत है न कि बल का अत्यधिक इस्तेमाल।"
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने कई देशों में दमनकारी तरीकों पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कुछ देशों में आंदोलनकारियों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है। उन्होंने चीन में तिब्बती लोगों के अधिकारों और धार्मिक आजादी पर बढ़ती पाबंदियों की ओर ध्यान दिलाया और ऐसी नीतियों को तुरंत बदलने की मांग की।
तुर्क ने ईरानी अधिकारियों पर दमन बढ़ाने का आरोप लगाया और फांसी की सजाओं में तेजी से बढ़ोतरी का जिक्र किया। उन्होंने निकारागुआ, रूस, अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया और युगांडा में भी राजनीतिक विरोध और मीडिया की आजादी पर पाबंदियों की ओर इशारा किया।
तुर्क की बातों ने भारत को उन देशों से अलग खड़ा किया जहां विरोध और असहमति का सामना बल और दमन से किया जाता है। उन्होंने युवा प्रदर्शनकारियों के साथ जुड़ाव और बातचीत को उन सरकारों के लिए एक रचनात्मक मॉडल बताया जो जनता की नाराजगी का सामना कर रही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में तुर्क ने क्या बताया?
- तुर्क ने सरकारों को सार्वजनिक विरोध पर संवाद और बातचीत अपनाने की सलाह दी।
- तुर्क ने किन देशों में दमनकारी क़दमों की आलोचना की?
- उन्होंने चीन, ईरान, निकारागुआ, रूस, अजरबैजान, जॉर्जिया, ट्यूनीशिया और युगांडा का उल्लेख किया।
- तुर्क ने भारत के युवा आंदोलन के मॉडल को कैसे बताया?
- उन्होंने इसे बल के बजाय बातचीत पर आधारित एक रचनात्मक मॉडल कहा।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने तिब्बती लोगों की स्थिति पर क्या कहा?
- उन्होंने चीन में तिब्बती लोगों के धार्मिक और अधिकारों पर बढ़ती पाबंदियों की आलोचना की।
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