नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का IPO सेबी से मंजूर, 15 सितंबर से शुरू होगा इश्यू
देश के सबसे बड़े IPO में NSE के 14.89 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल के तहत बिकेंगे
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का लंबे समय से अटका हुआ IPO भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है। इसके बाद NSE के सार्वजनिक होने का रास्ता साफ हो गया है और 15 सितंबर से शेयर बिक्री शुरू होने की संभावना है।
NSE का IPO देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसमें कुल 14.89 करोड़ शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे, जो NSE की कुल चुकता पूंजी का करीब 6 प्रतिशत हैं। इन शेयरों की फेस वैल्यू 1 रुपये है। IPO का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो 2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 28,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को पार कर सकता है।
NSE के शेयर अनलिस्टेड बाजार में करीब 1,975 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कारोबार कर रहे थे। इस भाव पर NSE का कुल बाजार मूल्य लगभग 4.88 लाख करोड़ रुपये है। NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) है, जो इस IPO में अपने शेयर नहीं बेच रही है और IPO के बाद भी उसकी हिस्सेदारी बनी रहेगी।
IPO में शेयर बेचने वाले प्रमुख निवेशकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), SBI कैपिटल, बैंक ऑफ बड़ौदा, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।
SBI ने NSE के शेयर औसतन करीब 0.8 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा की हिस्सेदारी की खरीद लागत लगभग 0.54 रुपये प्रति शेयर रही।
NSE ने IPO की तैयारी के लिए कुल 20 निवेश बैंकों को जिम्मेदारी सौंपी है, जो किसी IPO के लिए बड़ी संख्या है।
जून 2026 में खत्म हुई पहली तिमाही में NSE का मुनाफा 3,120 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही के 2,923 करोड़ रुपये से अधिक है। आय भी बढ़कर 4,560 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में आय 4,032 करोड़ रुपये थी। हालांकि, मार्च 2026 की पिछली तिमाही के मुकाबले जून तिमाही की आय में 8 प्रतिशत की गिरावट आई।
NSE के IPO की मंजूरी से पहले इसके पुराने कानूनी मामलों में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ। SEBI की मंजूरी से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में SEBI की अपीलों का निपटारा कर दिया था। यह कार्रवाई NSE की ओर से 1,491.21 करोड़ रुपये के समझौते के बाद हुई।
को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले NSE के IPO की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकने की मुख्य वजह थे।
NSE अगले हफ्ते IPO का प्राइस बैंड जारी कर सकता है और इसके शेयर 25 सितंबर तक बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्ट हो सकते हैं।
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