सुप्रीम कोर्ट ने एमडीयू सहायक प्रोफेसर की नौकरी बचाई
पीएचडी डिग्री की जांच का आदेश, फर्जी पाए जाने पर पुलिस शिकायत का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर की नौकरी बरकरार रखी है, बावजूद इसके कि उनकी पीएचडी डिग्री की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। कोर्ट ने डिग्री की जांच करने और यदि वह फर्जी पाई जाए तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
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पीटीआई। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर की नौकरी पीएचडी डिग्री फर्जी होने की आशंका के बावजूद रद करने से इनकार किया। कोर्ट ने डिग्री की प्रामाणिकता जांचने का निर्देश दिया है और फर्जी पाए जाने पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय को पीएचडी डिग्री की जांच करने का आदेश दिया है।
नियुक्ति और चयन प्रक्रिया
एमडीयू से संबद्ध रोहतक के संत जींदा कल्याणा कालेज ने 14 फरवरी 2018 को शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर पद के लिए विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छठा प्रतिवादी सबसे योग्य उम्मीदवार के रूप में सामने आया और उसे यह पद मिला।
सुप्रीम कोर्ट ने इस नियुक्ति को बरकरार रखा है, लेकिन डिग्री की प्रामाणिकता की जांच के आदेश भी दिए हैं।
इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी और सहायक प्रोफेसर ने यूजीसी-नेट उत्तीर्ण करने की अनिवार्य शर्त पूरी की है
सुप्रीम कोर्ट, पीठ
अगर डिग्री फर्जी पाई जाती है तो विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है
सुप्रीम कोर्ट, पीठ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- यदि डिग्री फर्जी पाई गई तो क्या होगा?
- विश्वविद्यालय पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है और आवश्यक कार्रवाई करेगा।
- क्या पीएचडी डिग्री सहायक प्रोफेसर पद के लिए अनिवार्य थी?
- नहीं, इस पद के लिए पीएचडी डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी।
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